ग्राम पंचायतों में अब हर निधि का बैंक खाता अलग होगा
बिजनौर। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने को है, लेकिन पंचायतों से मदवार खर्च पैसे का ब्योरा पंचायतराज विभाग के पास नहीं आया है। पंचायतों में पंद्रहवें वित्त आयोग का पैसा आने वाला है। शासन ने पैसे के बंदरबांट को रोकने के लिए पंचायतों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब पंचायतों का हर निधि का खाता अलग होगा। इससे पैसे की प्रभावी मानीटरिंग हो सकेगी।
ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए केंद्रीय वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग, राष्ट्रीय स्वराज ग्रामीण योजना में धन आवंटित होता है। इसके अतिरिक्त अंत्येष्टि स्थल निर्माण योजना आदि अनेक योजना में पैसा आता है। अब तक सभी योजनाओं का पैसा एक ही खाते में आता है। इससे शासन को यह पता नहीं चलता था कि किस मद में कितना पैसा व्यय हुआ है। पंचायतों का मौजूदा पांच साल का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। सूत्रों के अनुसार पंचायतों ने मदवार खर्च पैसे का विवरण पंचायतराज विभाग को नहीं दिया है। शासन को विकास कार्यों के लिए आए पैसे में बंदरबांट होने की शिकायत मिल रही थी। मामले को गंभीरता से लिया गया। शासन ने भ्रष्टाचार में जीरो टालरेंस की नीति के अनुसार सख्त कदम उठाया है। अब पंचायतों का बैक में हर निधि का खाता अलग होगा। शासन के ग्राम पंचायत सचिवों को 48 घंटे में बैक खाता खोलने के निर्देश हैं। खातों की जांच के बाद डीपीआरओ दफ्तर में फिडिंग होगी। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि खाते उसी बैंक में होंगे जहां पुराना खाता है। पहला खाता बंद नहीं होगा। बताया कि ऐसा होने पर विकास कार्यों के लिए आए पैसे की प्रभावी मानीटरिंग होगी। पंचायत मनमानी तरीके से पैसा खर्च नहीं हो सकेगी।