अवैध निर्माण पर केवल जारी होते हैं नोटिस
बिजनौर। जिले में काफी जगह पर अवैध व नियमों को ताक पर रखकर निर्माण होता रहता है। लेकिन इसके बाद केवल नोटिस देकर मामले को निपटा दिया जाता है। नोटिस सालों तक पहले अधिकारियों, शासन और अदालत में चलते रहते हैं। जिले में आज तक किसी अवैध निर्माण को ध्वस्त नहीं कराया गया है। जनपद में कोई कार्रवाई नहीं होती तो नियमों को ताक पर निर्माण करना जोखिम भरा काम नहीं रह जाता है।
मकान बनाने के नियम होते हैं। प्लॉट के आधार पर उसमें कुछ हिस्सा बिना निर्माण के रखना होता है। इसके अलावा विनयमित शुल्क अगर एक मंजिला मकान का जमा किया जाता है तो उतना निर्माण ही करना होता है। दो मंजिला या तीन मंजिला भवन नहीं बना सकते हैं। इस तरह के भवन पर या तो शुल्क लगाया जाता है या फिर अवैध निर्माण को ध्वस्त कराया जाता है। जिले में अब तक कहीं पर भी अवैध निर्माण को ध्वस्त नहीं कराया गया है। जिला मुख्यालय पर शास्त्री चौक स्थित शॉपर्स प्राइड मॉल में पीछे की ओर जमीन को खुला नहीं छोड़ा गया और वहां पर भी निर्माण कर दिया गया था। इस मामले में ध्वस्तीकरण के निर्देश हुए लेकिन मामला सालों से अफसरों की कोर्ट में ही चल रहा है। जिले में और भी दर्जनों भवनों को अवैध निर्माण के नोटिस जारी हुए हैं, लेकिन होता कुछ नहीं है।
डीएम का ट्रांसफर, नहीं हटा अतिक्रमण
नगर पालिका व ग्राम पंचायत सरकारी जमीन पर हुए निर्माण को ध्वस्त कराती हैं। साल 2016 में तत्कालीन डीएम वीके आनंद ने बिजनौर नगर पालिका में अतिक्रमण को खत्म कराने के लिए प्रतिष्ठानों पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण के लाल निशान लगवा दिए थे। पालिका ने तब सड़क पर बनी सीढ़ी आदि तुड़वाईं भी थीं। काफी दुकानदारों ने सीढ़ी आदि को खुद तोड़ दिया था तो गली, मोहल्लों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों ने भी अपने अवैध निर्माण को तोड़ा था। डीएम के तबादले के बाद पक्के अतिक्रमण के खिलाफ कुछ नहीं किया गया।
हरित पट्टी पर भी किया गया है निर्माण
नक्शे को लेकर होने वाले विवादों में पहले एसडीएम कोर्ट और फिर डीएम कोर्ट में सुनवाई होती है। इसके बाद मामला पहले कमिश्नर और फिर शासन को जाता है। इसके बाद भी मामला हाईकोर्ट जा सकता है। इस प्रक्रिया में दशकों लग जाते हैं। जिले में कई जगह हरित पट्टी वाली जगह में प्लॉट काट दिए गए हैं। इनके खिलाफ नोटिस जारी होते हैं लेकिन नोटिस से प्लॉटिंग करने वाले नहीं डरते हैं। कई जगह पर तो हरित पट्टी पर कॉलोनी बस चुकी हैं।