धामपुर में अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के अंतर्गत निबंध प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। प्रतियोगिता में कॉलेज की छात्राओं ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। प्रतियोगिता के माध्यम से छात्राओं ने संदेश दिया कि महिलाएं हर युग में अपराजिता रही हैं। उनको केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना है। प्राचार्य डा.पूनम चौहान व राजनीति विभाग की पूर्व अध्यक्ष डा.शांति शर्मा ने छात्राओं को नारी गरिमा के प्रति सजग रहने को शपथ भी दिलाई।
एसबीडी कालेज में संपन्न हुए कार्यक्रम में गांधी नारी कल्याण समिति की अध्यक्ष, राजनीति शास्त्र की पूर्व विभाग अध्यक्ष डा.शांति शर्मा ने कहा कि नारी न कभी हारी थी न हारेगी। बचपन में पिता का साया उठने के बाद यह प्रश्न मुंह बाय खड़ा था कि वे अब कैसे आगे बढ़ेंगी, पर वे रुकी नहीं। आगे बढ़ी और बढ़ती ही रही। बाल विवाह होने के बाद समिति जिम्मेदारी पर वे तब भी हारी नहीं। खड़ी रही आत्मविश्वास के साथ। आज भी हारी नहीं है, नारी अपराजिता रही है और वह हारेगी भी क्यों, जब सशक्त कलमकार उसके साथ खड़े हो और उसकी अभिव्यक्ति का माध्यम बने हों। इस मौके पर छात्राओं की नारी गरिमा शीर्षक पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें कॉलेज की छात्राओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। प्राचार्य पूनम चौहान ने कार्यक्रम की सराहना की। इस मौके पर डा.सारिका शर्मा, डा.संजू, डा.रेनू चौहान, डा. नरगिस, डा.राहिन, डा,साक्षी, डा.कनक रहीं।
समान मौके देेने की जरूरत: डा. साक्षी रस्तोगी
डा. साक्षी रस्तोगी का कहना है कि आज महिला सशक्तिकरण से जुड़े अभियानों की जरूरत है। तभी महिलाओं को उनकी गरिमा का बोध होगा। इसकी समाज को बहुत आवश्यकता होती है। तमाम महिलाएं कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स तो अंतरिक्ष तक में अपने पराक्रम का झंडा गाढ़ चुकी है।
नारी श्रद्धा का दूसरा रूप है: डा. कनक
शिक्षिका डा.कनक का कहना है कि शास्त्रों में । नारी को देवी का रूप बताया है। पर हमारा समाज अभी भी देवी को अबला ही मान व्यवहार करता है, जबकि नारी में विनम्रता कूटकूट कर भरी है। जो पुरुषों में नहीं है। नारी कभी अपराजित नहीं है। राजनीति शास्त्र की पूर्व विभागाध्यक्ष डा. शांति शर्मा का कहना है कि जब नारी के उपर से माता पिता का साया उठ जाता है, तब भी नारी अपराजिता रही है। वह हार नहीं मानती है। अपने घर परिवार की आन, बान की खातिर संस्कारित रहकर संघर्षो से खेलती हुए हार नहीं मानती। दूसरों के लिए प्रेरणादायी मिसाल बन समाज को सही दिशा देने का मार्ग प्रशस्त करती रहती है।
बोलीं छात्राएं, महिला को भी मिले पुरुषों जैसा सम्मान और अधिकार
बीएड की छात्रा जुबली सैनी ने अमर उजाला के प्रयास की सराहना की। कहा कि जब तक समाज महिलाओं को सताता रहेगा तब तक यह कार्यक्रम साकार नहीं हो पाएगा। मोनिका ने कहा कि संसार को पता है कि महिलाएं हर क्षेत्र में देश के नाम को रोशन कर रही हैं। फिर भी नारी को शासन और प्रशासन के बीच अधिकारों और राजनैतिक दलों के बीच हक पाने के मामले में दलदल में फंसी है। छात्रा नेहा सिंह का कहना है कि नारी देवी है। पर महिला को देवी बता उसके स्वर छीन लेने का माध्यम है। नारी भी मानवीय गुणों से विद्यमान है। उसे भी वहीं सम्मान चाहिए, जो पुरुषों को मिलता है। छात्रा कामाक्षी रानी का कहना है कि महिलाओं को अपना अधिकार तभी मिलेगा जब वह इसे पाने को जागरूक हो। नारी का अपमान कभी भी नहीं करना चाहिए। छात्रा यशिका का कहना है कि छात्राएं शिक्षा, चिकित्सा, लोकसेवा में भर्ती होकर देश का नाम रोशन कर रही हैं। हर क्षेत्र में नारी प्रतिष्ठित पदों पर हैं। अपनी सूझबूझ से समाज का नेतृत्व कर रही हैं। नारी के लिए रूढ़िवादी सोच को अब समाज को बदलना चाहिए। दीपांक्षी ने अमर उजाला के इस कार्यक्रम की सराहना की। कहा कि अमर उजाला ही एक ऐसा समाचारपत्र है जो नारी गरिमा महत्ता से समाज को जागरूक कर रहा है। अमर उजाला का जितना भी धन्यवाद ज्ञापित किया जाए कम ही होगा।