पात्र होने के बाद भी नहीं गोल्डन कार्ड
बिजनौर। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में शामिल होने के लिए पात्र दर-दर भटकने को मजबूर हैं। लाभार्थियों की श्रेणी में होने के बावजूद सैकड़ों लोगों का सूची में नाम नहीं है, जबकि कई लोग ऐसे हैं जो लाभार्थियों की श्रेणी में नहीं आते और उनके कार्ड बने हैं। लोग गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का मकसद देश के करीब दस करोड़ बीपीएल परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख तक का मुफ्त इलाज देना है। यह विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है। इसके लिए जिले में दो लाख 90 हजार 324 पात्रों का चयन किया गया है और दो लाख 75 हजार गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं। करीब दस हजार कार्ड धारक गोल्डन कार्ड के माध्यम से विभिन्न अस्पतालों में अपना इलाज करा चुके हैं। गांव तरीकमपुर दरगो निवासी संजो देवी बताती हैं कि उनके पति अशोक गिरी उर्फ ढीलू की लगभग एक साल पहले मौत हो गई थी। पात्र होने के बावजूद उनका अथवा उनके परिवार के किसी अन्य सदस्य का नाम योजना में शामिल नहीं है।
आलमपुरगंगा उर्फ गंगावाला निवासी सत्यजीत सिंह का कहना है कि आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के लिए सरकार को फिर से सर्वे कराना चाहिए। गांव औरंगपुर हृदय निवासी उर्मिला बताती हैं कि उनके पति अनिरुद्ध शर्मा की लगभग छह साल पहले मौत हो गई थी। वे अंत्योदय राशन कार्ड धारक हैं, लेकिन उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला है। नजीबाबाद की हिमालयन कॉलोनी निवासी सुभाष चंद्र शर्मा ने बताया कि वे तेल का टैंकर चलाकर अपनी गुजर बसर करते हैं। इसके अलावा उनके पास कोई जरिया नहीं है। मगर फिर भी उनका गोल्डन कार्ड नहीं बन पा रहा है। योजना की जिला कोआर्डिनेटर डॉ. नताशा सिंह ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत सभी पात्रों के आयुष्मान कार्ड बनाने का काम जारी है। जिनका नाम सूची में है, उन सभी के गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे।