बिजनौर के डाक बंगले में जलता कूड़ा।
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बिजनौर में जिले के आला अधिकारियों की नाक के नीचे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों की धज्जियां उड़ रही हैं। सरकारी दफ्तरों से लेकर गली-मोहल्लों में कूडा-करकट जलाया जा रहा है। ऊर्जा मंत्री की अगवानी के लिए शहर की सफाई के बाद जमा कूड़े को भी जलाया गया। इससे निकले प्रदूषित धुएं व हानिकारक गैसों का लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
एनजीटी के आदेश है कि किसान खेतों में फसलों के अवशेष नहीं जलाएं। कूड़ा-करकट भी खुले में नहीं जलाया जा सकता। आदेश के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान भी है। इससे निकलने वाली कार्बन-डाई-आक्साइड, कार्बन-मोनो-आक्साइड और कई अन्य गैसें स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। एनजीटी के आदेश के बाद किसानों ने तो खेत में गेहूं, गन्ने आदि फसलों के अवशेष जलाने बंद कर दिए, परंतु जिन पर आदेश पालन कराने की जिम्मेदारी है, वे ही इनकी धज्जियां उड़ा रहे हैं। सरकारी भवनों, दफ्तरों में सफाई के बाद लगे कूड़े के ढेर को खुलेआम जलाया जा रहा है।
सफाईकर्मी सडक किनारे खड़े पेड़ों की पत्तियां, पॉलिथीन, कूड़ा आदि को पानी निकासी के लिए बने नालों में भर देते हैं। यहां इनके सड़ने से दुर्गंध के चलते लोगों का निकलना दूभर हो जाता है। नालों में कूड़ा चॉक हो जाने से जल निकासी रुक जाती है। शनिवार को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री व जिला प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा सरकार बनने के बाद पहली बार बिजनौर आ रहे हैं। उनकी अगवानी के लिए शहर की मुख्य सड़कों, कलक्ट्रेट, एसपी, पीडब्लूडी, बिजली दफ्तरों, विकास भवन की युद्ध स्तर पर साफ-सफाई हो रही है। मेन गेट समेत दफ्तरों में जगह-जगह कूड़े ढेर जलाए गए।
इसके बाद राख उड़ रही है। सांस के साथ यह शरीर में पहुंच कर नुकसान कर रही है। तमाम आला अधिकारी यहीं से गुजर रहे हैं, पर किसी ने जलते कूड़े की ओर नजर डालना भी मुनासिब नहीं समझा।