एनजीटी का आदेश : नर्सिंग होम में ईटीपी लगाना हुआ जरूरी
बिजनौर। अस्पतालों से भारी मात्रा में लिक्विड वेस्ट या गंदा पानी निकलता है जो नालों में चला जाता है। इससे संक्रमण के फैलने का खतरा ही नहीं रहता बल्कि भूजल भी प्रदूषित हो जाता है। इससे निपटने के लिए एनजीटी आगे आया है। जिसने अस्पतालों में ईटीपी को जरूरी कर दिया है। ईटीपी लगा है या नहीं, यह जांच प्रदूषण नियंत्रण विभाग करेगा। एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाने वालों अस्पतालों पर गाज गिरेगी। जिन्हें कानूनी कार्रवाई के साथ जुर्माना भी अदा करना पड़ सकता है।
10 से अधिक बेड वाले अस्पतालों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के तहत अस्पतालों में लिक्विड वेस्ट के निष्पादन का इंतजाम करना अनिवार्य कर दिया गया है। अब सभी अस्पतालों को लिक्विड वेस्ट के निष्पादन के लिए ईटीपी प्लांट लगाने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। एनजीटी ने हाल ही में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश जारी किए हैं। जिसमें अस्पतालों में ईटीपी प्लांट लगाने को अनिवार्य बताया गया है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की मानें तो अस्पतालों से मवाद, खून, केमिकल्स, सर्जरी से निकलने वाली तरल गंदगी, संक्रमित पानी निकलता है जो सीवेज लाइन के माध्यम से जाकर नालियों में बह जाता है। यह पानी संक्रमित होता है। इसके कारण चर्म रोग, कैंसर सहित अन्य बीमारियों के फैलने का भी खतरा बना रहता है। अस्पताल से निकलने वाला संक्रमित लिक्विड भूजल को भी प्रभावित करता है। प्लांट लगने के बाद इसका आसानी से ट्रीटमेंट किया जाएगा।
क्या है ईटीपी
अस्पतालों से जो गंदा पानी और तरल पदार्थ निकलता है, उसे एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट(ईटीपी) में साफ किया जाता है। जिसके बाद नालियों में भी अगर अस्पतालों का पानी बहेगा तो भूजल को प्रदूषित नहीं करेगा। स्वास्थ्य विभाग को यह भी मालूम नहीं है कि अस्पतालों में ईटीपी लगा है या नहीं है। यह भी जानकारी नहीं है कि अस्पतालों से निकलने वाला गंदा पानी कहां जा रहा है। सीएमओ विजय कुमार गोयल ने बताया कि उन्हें जानकारी नहीं है कि कितने अस्पतालों में ईटीपी लगा हुआ है।
एनजीटी का आदेश मिला है। जिसमें सभी नर्सिंग होम के लिए ईटीपी लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि किसी अस्पताल में ईटीपी सेंटर नहीं है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिसमें जुर्माने का भी प्रावधान है-आशुतोष चौहान, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी