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गन्ने की नई प्रजाति देगी बंपर पैदावार, रोग भी कम लगेंगे

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बिजनौर। गन्ने की 0238 प्रजाति के विकल्प के तौर पर किसानों को नए बीज मिलने जा रहे हैं। गन्ना किसानों के लिए गन्ने की नई प्रजातियां तैयार हो गई हैं। 14201 व 14233 प्रजाति की फसल अधिक पैदावार देंगी और इनमे रोगों, कीटों का प्रभाव भी कम रहेगा। अगले साल इन दोनों प्रजातियों का बीज किसानों को मिलने लगेगा। किसान इन प्रजातियों को बोकर मोटी कमाई करेंगे।
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जिले के किसानों ने 0238 प्रजाति के गन्ने को पूरी तरह अपना लिया है। किसानों को सही मायनों में कमाई 0238 प्रजाति ने ही कराई है। यह प्रजाति कम उपजाऊ जमीन में भी अच्छा खासा उत्पादन दे देती है। लेकिन अब किसान पूरी तरह से इसी गन्ने पर ही आश्रित हो गया है। गन्ने की किसी एक प्रजाति का रकबा जिले में 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। लेकिन 0238 का रकबा जिले में करीब 98 प्रतिशत तक है। जिले में करीब दो लाख 40 हजार जमीन में केवल यही प्रजाति लहरा रही है। इस प्रजाति में रोग आते रहते हैं। किसान काफी समय से दूसरी प्रजातियों की भी मांग कर रहे थे। उनकी यह मांग अब पूरी होने जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों ने गन्ने की दो नई प्रजाति 14201 व 14233 तैयार की हैं। दोनों प्रजाति बंपर पैदावार देंगी और इनमे रोग भी कम आएंगे। अगले साल से थोड़ी थोड़ी करके इसका बीज किसानों के बीच पहुंचना शुरू हो जाएगा।
ये है खासियत
14201 अगेती प्रजाति का गन्ना है। इसका औसत उत्पादन 84.34 से 91.58 टन प्रति हेक्टेयर तक है। इसका गन्ना सीधा होता है। इसे बंधाई की कम जरूरत होती है। इसका गुड़ सुनहरे रंग का होता है। इसमे लाल सड़न रोग व कीटों का प्रभाव कम रहता है। 14233 पछेती प्रजाति का है। इसका गन्ना मध्य लंबा व बहुत ठोस होता है। यह थोड़ा टाइट होता है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अधिक होती है।
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0238 अब लाल सड़न का शिकार
0238 प्रजाति अब रोगों से ग्रसित होने लगी है। इसमें लाल सड़न रोग का बहुत प्रभाव रहता है। बहादरपुर चीनी मिल की ओर तो इसका दस प्रतिशत रकबा लाल सड़न की वजह से बर्बाद हो चुका है।
0118 के नाम से बिकेगी 0239 प्रजाति
शासन ने गन्ने की 0239 व 0118 प्रजाति को एक ही माना है। इसलिए 0239 नाम को खत्म कर दिया गया है। 0239 प्रजाति का गन्ना 0118 के नाम पर खरीदा जाएगा। दोनों प्रजाति अगेती हैं।
एक ही प्रजाति पर न रहें आश्रित
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार किसानों को नई प्रजातियों के बीज भी अपनाने चाहिए। एक ही प्रजाति के पीछे आश्रित नहीं होना चाहिए। शासन की आपूर्ति के आधार पर किसानों को बीज उपलब्ध कराया जाएगा।
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