न बैंड बाजा, न बराती, घरों में पूरी हुईं रश्में
बिजनौर। कोरोना महामारी के कारण इस बार शादियों में पहले जैसी रौनक नहीं है। जिले में भड़लिया नवमी पर सैकड़ों शादियां हुईं, लेकिन बड़ी सादगी के साथ सभी रश्में घरों में ही अदा की गईं। शादियों में न बैंड बजे और न ही बराती नजर आए। अबूझ सहालग के दिन भी बैंक्वेट हॉल सूने रहे।
आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी है। इसे भड़लिया नवमी भी कहा जाता है। डबराल ज्योतिष सदन के प्रभारी पंडित प्रभुदत्त डबराल ने बताया कि कोरोना महामारी का असर सभी वर्गों पर पड़ा है। अगर इसका दूसरा पहलू देखा जाए तो विवाह संस्कार बिल्कुल समय पर और तसल्लीपूर्वक हो रहे हैं, जबकि सामान्य दिनों में होने वाली शादियों में लोग रीति रिवाज करने में महज खानापूर्ति ही करते हैं, लेकिन अब ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। शांतिपूर्ण ढंग से सारे काम आराम से हो जाते हैं। पंडित गणेश चंद ध्यानी का कहना है कि साल में चार नवरात्र आते हैं। इनमें से चैत्र और आश्विन मास के नवरात्र के बारे में तो अधिकांश लोग जानते हैं और उन्हें उत्सव के रूप में मनाते हैं, लेकिन गुप्त नवरात्र के बारे में बहुत ही कम लोग जाते हैं। आज गुप्त नवरात्र की नवमी है। इसे भड़लिया नवमी भी कहा जाता है। इस दिन विवाह आदि कोई भी शुभ कार्य करना बड़ा ही शुभ माना जाता है।
बैंक्वेट में तीन माह से नहीं हुआ कोई कार्यक्रम
किरन उत्सव मंडप के स्वामी सुनील कुमार गोयल बताते हैं उनके यहां पर केवल लॉकडाउन से पूर्व ही शादियां हुई थी। करीब तीन माह से एक भी कार्यक्रम बैंक्वेट हॉल में नहीं हुआ। इससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। शहनाई बैंक्वेट हॉल के मालिक राजू अग्रवाल ने बताया कि उनके यहां पर आखिरी शादी 28 फरवरी को हुई थी। इसके बाद से अब तक काम बिल्कुल ठप पड़ा है। काम बंद होने से जरूरी खर्च निकल पाना भी मुश्किल हो रहा है।
खाना बनाने के लिए नहीं मिला एक भी ऑर्डर
हलवाई घनश्याम अग्रवाल का कहना है कि करीब 20 दिन से ही काम शुरू हुआ है। पहले सैकड़ों लोगों का खाना बनाने का ऑर्डर मिलता था, लेकिन अब शादियों में मात्र 50 लोगों की अनुमति मिलने से कम खर्च पर ही काम चलाना पड़ रहा है। हलवाई प्रह्लाद सैनी ने बताया कि आमतौर पर यदि 200 आदमियों का खाना बनाना होता था तो करीब 40 हजार रुपये की बुकिंग होती थी, लेकिन अब काम बहुत ही कम हो गया है। करीब तीन माह से उन्हें एक भी बुकिंग नहीं मिली। लॉकडाउन में लेबर को भी अपने पास से ही पैसे देने पड़े।
बैंड बाजे वालों का काम पूरी तरह ठप
महबूब बैंड के स्वामी मुस्तकीम ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से कोई भी शादी की बुकिंग नहीं आई। इससे लेबर का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है। उन्होंने बताया कि चार माह में कई लाख रुपये का नुकसान हुआ है। आमतौर पर एक शादी की बुकिंग करीब 15 से 20 हजार रुपये तक की होती है, लेकिन इस बार कोरोना की वजह से काम ठप हो गया। जनता बैंड के मालिक जरीफ अहमद के मुताबिक कोरोना महामारी से सभी को परेशानी हुई है। विवाह कराने वाली टीम में शामिल अन्य लोगों का काम तो थोड़ा बहुत चल भी रहा है, लेकिन बैंड बाजे वालों का रोजगार पूरी तरह से बंद हो चुका है।