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जिले के फोरलेन हाईवे किनारे बनेंगे नीम कॉरीडोर

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जिले में फोरलेन हाईवे के किनारे बनेंगे नीम कॉरीडोर
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बिजनौर। अब हाईवे के किनारे यूकेलिप्टस के लंबे पेड़ नहीं दिखाई देंगे, बल्कि नीम की ठंडी छाव मिलेगी। वन विभाग जिले से गुजर रहे फोरलेन हाईवे किनारे नीम कॉरीडोर विकसित करने की तैयारी कर रहा है। दरअसल हाईवे की खाली पड़ी जमीन पर नीम लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए कुछ जगहों पर नीम के पौधे लगाए जाएंगे तो बड़ी जगह पर राजस्थान की तर्ज पर सीधे नीम के बीज ही लगाए जाएंगे। नीम कॉरीडोर पर्यावरण को तो फायदा करेगा ही, साथ ही इसकी छाव में रुककर यात्री इसके औषधीय गुणों का लाभ भी उठा सकेंगे।
जिले में मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे 119 को फोरलेन में तब्दील किया जा रहा है। इससे पहले तक यह हाईवे टू लेन यानि दस मीटर चौड़ा ही था। फोरलेन करने के लिए सड़क के दोनों ओर खड़े पेड़ काट दिए गए। अब यह सड़क पेड़ विहीन हो चुकी है। उधर, हरिद्वार-काशीपुर नेशनल हाईवे 74 को फोरलेन में तब्दील कर लिया गया है। इस हाईवे को फोरलेन करने का काम जिले में कुछ ही जगहों पर बाकी रह गया है। इस सड़क को फोरलेन बनाने के लिए भी पेड़ काट दिए गए थे। उधर, पानीपत-खटीमा नेशनल हाईवे का हिस्सा बनी बिजनौर कोतवाली रोड पर भी सड़क निर्माण चल रहा है। यह फोरलेन तो नहीं हो रही है, लेकिन चौड़ाई बढ़ रही है। फिर भी बिजनौर कोतवाली मार्ग के दोनों ओर खड़े दरख्त पेड़ों को काट डाला गया। अब इन तीनों ही हाईवे के किनारे नीम कॉरीडोर बनाए जाने की कवायद चल रही है। यानि सड़क के दोनों ओर खाली पड़ी जमीन पर अधिकांश संख्या में नीम के पौधे रोपित किए जाएंगे। हालांकि फलदार पौधे भी लगेंगे लेकिन, दो तिहाई संख्या नीम की होगी। वन विभाग ने अपनी नर्सरी में नीम की पौध तैयार करना भी शुरू कर दिया है। (संवाद)
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काटे गए थे लगभग ढाई लाख पेड़
तीनों हाईवे बनाने के लिए पिछले तीन सालों के भीतर ही करीब ढाई लाख पेड़ काट दिए गए। हरिद्वार-काशीपुर हाईवे के किनारे खड़े हजारों पेड़ों पर सड़क के विकास के लिए ही आरी चली थी। वहीं मेरठ-पौड़ी हाईवे को फोरलेन बनाने के लिए बिजनौर से नजीबाबाद तक सभी पेड़ काट दिए गए। उधर, पेड़ों की अधिकता की वजह से जिले की सबसे ठंडी कहलाए जानी वाली बिजनौर कोतवाली रोड भी आज पेड़ विहीन हो चुकी है। अभी बिजनौर से बैराज तक ही 15 हजार पेड़ काटे जाने हैं। काटे गए पेड़ों की पूर्ति करने के लिए ही बड़े स्तर पर पौधरोपण की तैयारी चल रही है।
पौध तैयार करने का खर्च बचेगा
डीएफओ डॉ. अनिल पटेल ने बताया कि पौध बड़े स्तर पर तैैयार नहीं हो पाती। ऐसे में भी वन विभाग ने यह राजस्थान मॉडल अपनाने पर भी विचार किया है, जिसमें सड़क किनारे बरसात के मौसम में बीज रोपित कर दिए जाएंगे। बीज से अंकुर फुटने पर पौध तैयार होगी और उसी जगह यह पौध पेड़ बन जाएगा। इसमें पौध तैयार करने का खर्च भी बचेगा। बता दें कि यह राजस्थान में ऐसा ही हुआ है।
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वर्जन...
जो सड़क चौड़ी हुई हैं, उनके किनारों पर यह प्रयोग किया जाएगा। दोनों ओर खाली पड़ी जमीन पर नीम के बीज और पौधे लगवाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए एनएच अथॉरिटी अफसरों से वार्ता कर पूरी योजना तैयार कर ली जाएगी।
- डॉ. अनिल पटेल, डीएफओ बिजनौर
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