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नारा-ए-हैदरी और मौला अली की गूंजी सदाएं

Sun, 13 May 2018 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
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मजलिस को खिताब करते मौलना अली गाजी। - फोटो : अमर उजाला
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नजीबाबाद में मुश्किल कुशा मौला अली की दरगाह पर नजराना-ए-अकीदत पेश करने और मन्नते मांगने का सिलसिला जारी है। शम्सुल हसन हॉल, दरगाह परिसर, मातमी मजलिसों और मातमी जुलूसों से गमगीन है।  
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बारगाह-ए-मौला अली में जियारत करने आए हजारों जायरीन रात दिन जोगीरम्पुरी दरगाह की जियारत कर मन्नते मांगने में मशगूल हैं। शम्सुल हसन हॉल से शनिवार को मातमी मजलिसों के दौरान नारा-ए-हैदरी... और मौला अली की सदाएं गूंजतीं रहीं। मजलिसों को खिताब करते हुए शिया विद्वानों ने हजरत इमाम हुसैन उनके खानदान और साथियों पर हुए जुल्मो-सितम का बयां किया तो जायरीन आंखों को नम होने से न रोक पाए। जायरीनों ने सीनाजनी कर करबला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की।  
शम्सुल हसन हॉल से मातमी मजलिस को खिताब करते हुए मेमन सादात से आए शिया विद्वान मौलाना गुलाम मासूम ने कहा कि हमारी जिंदगी अल्लाह और दुनिया के कानून पर चलती है। अल्लाह के कानून से बंधकर हम अपने धर्म के उसूल अपनाते हैं। उन्होंने रोजा-नमाज और इबादत करने तथा हजरत इमाम हुसैन की शहादत से सबक लेने की सलाह दी। 
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मजलिस को खिताब करते हुए मौला अली काजी ने फरमाया कि हजरत इमाम हुसैन मारफत का चिराग, हिदायत का मीनार और निजात का जरिया हैं। उन्होंने कहा कि उनके किरदार से दुनिया को इंसानियत, नेकी और दीन के लिए सब कुछ न्योछावर करने का पैगाम मिलता है। उन्होंने अपनी कुर्बानी से शरियत और इंसानियत को बचाया। दरगाह सचिव विसाल मेहदी की देखरेख और नसीमुल बाकरी के संचालन में आयोजित मजलिसों को मौलाना मो.हसन अकबर जौनपुरी सहित कई उलेमा ने खिताब किया। 
मातमी जुलूसों से माहौल हुआ गमगीन 
नजीबाबाद। जोगीरम्पुरी में जियारत के लिए पहुंची अंजुमनों ने शनिवार को अलम, जुलजना और ताबूत के मातमी जुलूस बरामद किए। नोहा ख्वानी और मर्सिया ख्वानी के साथ निकाले गए जुलूस दरगाह परिसर की गश्त करते हुए हजरत मौला अली के रोजे पर जाकर समाप्त हुए। अंजुमन सोगवारे हुसैनी, अंजुमन जुल्फकारे हुसैनी, लश्करे हुसैनी, यादगारे हुसैनी, अंजुमन हैदरी, अंजुमन हुसैनिया, अंजुमन आब्दिया, इरफाने अजा, अजाए हुसैनी, अंजुमन अहले अमरोहा और अंजुमन इमामिया ने अपनी टीम के साथ मातमी जुलूस बरामद किए। 

हक से मिलती है मंजिल : मौलाना कसीम 
मजलिस को खिताब करने पहुंचे मौलाना कसीम अब्बास ने कहा कि हक और इंसानियत के जरिए इंसान किसी भी मंजिल को हासिल कर सकता है। हक और इंसानियत के लिए हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने करबला की जंग जीती। हक और बातिल, सच और झूठ की जंग में क्रूर यजीद को मुंह की खानी पड़ी। 
सभी ने सराह इमाम का किरदार : मौलाना काजी 
शिया विद्वान मौलाना अली गाजी ने कहा कि दरगाह-ए-आलिया नजफ-ए-हिंद से दुनिया को सांप्रदायिक सौहार्द का पैगाम मिलता है। उन्होंने कहा की हजरत इमाम हुसैन के किरदार को सभी धर्मों के लोगों ने प्यार-मोहब्बत और इंसानियत के नजरिए से अहम बताया। उन्होंने इमाम की मारफत रखने की सलाह दी। 
पटना से नजीबाबाद चलाएं एक्सप्रेस ट्रेन : अमजद अली 
पटना-बिहार से दरगाह की जियारत करने आए सफर-ए-गदीरी के सचिव अमजद अली ने पटना साहिब से नजीबाबाद तक गदीरी एक्सप्रेस ट्रेन शुरू करने की मुहिम छेड़ी है। मीडिया से मुलाकात में अमजद अली ने बताया कि बिहार सरकार से लेकर प्रधानमंत्री तक गदीरी एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन शुरू करने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि कोलकाता-अमृतसर के बीच एक मात्र अकालतख्त एक्सप्रेस ट्रेन का साप्ताहिक संचालन होता है। गदीरी एक्सप्रेस ट्रेन शुरू होने से हजारों जायरीनों और आम यात्रियों को राहत मिलेगी। अमजद अली ने दरगाह कमेटी के सचिव विसाल मेहदी और क्षेत्रीय जायरीनों से भी नजीबाबाद से गदीरी एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन शुरू कराने के लिए अभियान चलाने की सलाह दी। 
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