नांगलसोती। नांगलसोती और आसपास के क्षेत्रों में कोल्हुओं का संचालन किसानों के लिए त्योहारी सीजन में मददगार बना है। क्षेत्र की चीनी मिल का पेराई सत्र शुरू होने में समय है। नकदी फसल के रूप में कोल्हुओं पर किसान बड़े पैमाने पर गन्ना लेकर पहुंच रहे हैं।
नांगलसोती, सराय आलम, शहजादपुर, खानपुर, जालपुर में करीब 50 कोल्हुओं का गन्ना सीजन में संचालन होता है। इन कोल्हुओं पर प्रतिदिन हजारों क्विंटल गन्ने की पेराई कर करीब 500 क्विंटल गुड़ तैयार किया जाता है। दशहरा ,दिवाली आदि त्योहारों पर कोल्हू किसानों के लिए आर्थिक रूप से मददगार बनते हैं।
किसानों तेजपाल सिंह, प्रभात कुमार, विनय कुमार ने बताया कि अधिक बरसात होने के कारण चारे की फसल नष्ट हो गई है। पशुओं के लिए चारे का संकट, आर्थिक तंगी और त्योहारों को देखते हुए किसान कोल्हुओं पर गन्ना डाल रहे हैं। कोल्हू स्वामी नितिन, सूर्य प्रताप, मोनू का कहना है कि इस वर्ष गन्ने की फसल में कम रोग होने के कारण पिछले वर्ष की अपेक्षा रिकवरी भी सही है और गुड़ की गुणवत्ता में भी सुधार रहेगा। नांगल सोती क्षेत्र के कोल्हुओं में निर्मित गुड़ उत्तम गुणवत्ता व मिठास के लिए पहचान रखता है।
नांगल क्षेत्र में करीब 35 कोल्हुओं का संचालन शुरू हो चुका है। करीब एक दर्जन कोल्हू जल्द शुरू होने वाले हैं। मिठास और शुद्धता की दृष्टि से नांगल सोती के गुड़ की दूर-दूर तक पहचान है।
गुड़ पर पड़ी महंगाई की मार
नांगल सोती के कोल्हुओं पर तैयार गुड़ गत वर्ष 55 से 60 रुपये प्रति किलो तक बिका। वर्तमान में गुड़ 75 से रुपये प्रति किलो ग्राम तक बिक रहा है।
विदेशों तक पहुंचता है नांगल का गुड़
नांगल सोती के मिठास भरे शुद्ध गुड़ की पहचान विभिन्न राज्यों और विदेशों में भी है। नांगल का गुड़ प्रदेश की गुड़ मंडियों के साथ उत्तराखंड , दिल्ली, राजस्थान तक पहुंच रखता है, कनाडा ,जर्मनी और अन्य देशों में रहने वाले लोग अपने संबंधियों के माध्यम से नांगल का गुड़ मंगवाते हैं।