ग्रामीणों का आरोप, पुरानी सड़कों की मरम्मत के नाम ही निकाला गया धन
संवाद न्यूज एजेंसी
स्योहारा। ग्राम पंचायत मंडोरी में विकास कार्यों पर पौने तीन करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद जमीनी हालात बदतर है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पुरानी जर्जर सड़कों के निर्माण के नाम पर धन निकाला गया, जबकि गांव के हालात में कोई बदलाव नहीं हुए। मनरेगा योजना के अंतर्गत एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए, पर चकरोडों की हालत बदहाल है। बरसात में कई स्थानों पर नालियों का पानी घरों में घुस रहा है। अधिकांश गलियों में स्ट्रीट लाइट तक नहीं है।
मंडोरी क्षेत्र की बड़ी पंचायतों में शामिल है। इसके अंतर्गत मंडोरी व सफियाबाद गांव आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में काम कराने के नाम पर लाखों रुपये निकाले गए हैं। लेकिन गांव में स्ट्रीट लाइट की जरूरत पर ध्यान नहीं दिया गया।
ग्रामीण अली हसन का कहना है कि जो सड़कें दस वर्ष पहले बनीं थीं, उन्हीं की मरम्मत कराई जा रही है। स्ट्रीट लाइट न होने पर गांव में अंधेरा पसरा रहता है।
ग्रामीण साबिर मजीद का कहना है कि उनके मोहल्ले में सिर्फ नाली की मरम्मत की जा रही है। जितनी रकम साढ़े चार वर्ष में निकाली गई है वह गांव के विकास कार्य में नजर नहीं आ रही।
- ग्राम पंचायत में वर्षवार राज्य वित्त व मनरेगा से निकली धनराशि का ब्यौरा
- वर्ष 2021-22 में राज्य वित्त से 4320595, मनरेगा से 1615000
- वर्ष 2022-23 में राज्य वित्त से 3456488, मनरेगा से 2120000
- वर्ष 2023-24 में राज्य वित्त से 2347383, मनरेगा से 2519000
- वर्ष 2024-25 में राज्य वित्त से 6360417, मनरेगा से 2771000
- वर्ष 2025-26 में राज्य वित्त से 1288943, मनरेगा से 1153000
- गांव में कराए गए विकास कार्य धरातल पर मौजूद हैं। पहले कार्य का प्राकलन, आंकलन आदि बनाया जाता है। कार्यों की पहले व बाद की फोटो भी कराई जाती है। किसी भी विकास कार्य में गड़बड़ी का कोई मतलब ही नहीं है। सभी आरोप निराधार हैं। - ज्योति रानी, ग्राम पंचायत अधिकारी
पंचायत के दोनों गांव में निष्पक्ष विकास कार्य कराए गए हैं। दोनों गांवों में सीसी रोड, नालों व नालियों का निर्माण, गांव में नालियों पर चैनर, स्कूल में लैब, आरआरसी सेंटर, राशन की दुकान आदि का निर्माण कराया गया है। गांव में पक्ष-विपक्ष दोनों होते हैं। उन पर लगाए जा रहे आरोप गलत हैं। - मोहम्मद यामीन, ग्राम प्रधान