बिजनौर में एक गोदाम में रखा यूरिया।
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जुलाई में और आएंगी यूरिया की तीन रैक, भरेंगे गोदाम
बिजनौर। जिले में जुलाई से यूरिया की कोई किल्लत नहीं होगी। इस महीने यूरिया की तीन रैक जिले में आएंगी। इनमें कई हजार मीट्रिक टन यूरिया आएगा। पिछले महीने का भी कोटा दुकानों पर बचा हुआ है। यूरिया की आवक होने से कहीं भी कोई कमी नहीं रहेगी। इसके अलावा जिले में जुलाई में यूरिया की खपत भी मई व जून से कम होगी।
किसान खेतों में यूरिया खाद का खूब इस्तेमाल करते हैं। सबसे ज्यादा रकबा गन्ने का होने के कारण गन्ने की फसल में सबसे ज्यादा यूरिया डाला जाता है। किसानों ने मई में बारिश ज्यादा होने पर गन्ने की फसल में ज्यादा खाद डाला। इस वजह से मई मेें यूरिया की किल्लत हो गई। मई में आमतौर पर जिले भर के किसान खेतों में 25 हजार मीट्रिक टन यूरिया डालते हैं। लेकिन बारिश जल्दी होने की वजह से किसानों ने खेतों में 32 हजार मीट्रिक टन यूरिया डाल दिया। जून में हालांकि कम यूरिया किसानों ने खेतों में डाला। जून में किसान करीब 68 हजार मीट्रिक टन यूरिया डालते थे लेकिन किसानों ने 62 हजार मीट्रिक टन यूरिया खेतों में डाला। हालांकि जिले में 66 हजार मीट्रिक टन यूरिया ही था। धामपुर में कुछ क्षेत्र में दुकानों पर कई दिनों से यूरिया नहीं था। कृषि विभाग द्वारा किसानों के लिए लगातार यूरिया की रैक मंगवाई जा रही हैं। इस महीने भी 15 जुलाई तक जिले में यूरिया की तीन रैक पहुंच जाएंगी। इसमें हजारों टन यूरिया होगा। इस महीने की खपत के बाद गन्ने के खेतों में भी यूरिया की जरूरत नहीं रह जाएगी। जुलाई में जिले में करीब 15 हजार मीट्रिक टन यूरिया की ही जरूरत होगी।
यूरिया की नहीं है कमी
जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्र के अनुसार जिले में यूरिया की कोई किल्लत नहीं है। इस महीने भी यूरिया की तीन रैक मंगवाई जा रही हैं। किसानों की यूरिया की मांग को पूरा किया जा रहा है।