सहकारिता आंदोलन ने बदली खेती की तस्वीर
बिजनौर। आज सहकारिता दिवस है। सहकारिता आंदोलन ने खेत और खलिहान की तस्वीर बदलने के साथ हुनरमंदों की तकदीर बदली है। जिले के हजारों युवकों को रोजगार मिला है। समितियों में किसान की भागीदारी होने से खुशहाली आई है। जिले में सहकारी समितियों का जाल बिछा है। सहकारिता आंदोलन में अग्रणी रहे लोग अब सहकारिता के गिरते स्तर से चिंतित हैं।
सहकारिता आंदोलन वर्ष 1965 में शुरू हुआ। वयोवृद्ध जगदीश चंद गहलोत बताते है कि उस समय किसान मजदूर गरीबी में जकड़ा था। किसान अपने संसाधनों का सही उपयोग नहीं कर पा रहा था। पैसे की कमी से किसान सूदखोर के चंगुल में फंसकर कर्जदार हो रहा था। कर्ज न उतार पाने से किसान खेती विहीन होता जा रहा था। ऐसे में सहकारिता आंदोलन कारगर हथियार बनकर सामने आया। किसानों को नकद ऋण, खाद, बीज देने के लिए सहकारी समिति स्थापित की गई। इससे बेरोजगार युवकों को नौकरियां मिलीं। जिले में सहकारिता की जड़ जमाने में ग्राम तिगरी मनकावाला निवासी मथुरा सिंह का अहम योगदान रहा। वह लोगों को सहकारिता का महत्व बताने के लिए गांव गांव घूमे। पद यात्रा करके लोगों को जागरूक किया। मथुरा सिंह करीब 20 साल पीसीएफ के चेयरमैन रहे। बताया कि सहकारिता के क्षेत्र में हरिपाल शास्त्री, बाबू क्रांति कुमार के सहयोग को भो नहीं भुलाया जा सकता है। चौधरी हुकुम सिंह, शांति देवी, मुनिदेव शर्मा, जयवीर सिंह, सुरपाल सिंह जैसे सहकारिता के सिपाही आंदोलन को मजबूत करने में जुटे रहे। बढ़ती आयु का परवाह किए बिना जगदीश गहलोत सहकारिता के चिंतक हैं। जिले की विभिन्न विभाग की सहकारी समिति करोड़ों का व्यवसाय कर रही हैं। लाखों किसान मजदूर इनसे लाभान्वित हो रहे हैं।
पुरस्कार से जिले ने नाम कमाया
बिजनौर। जिले ने सहकारिता आंदोलन में नाम कमाया है। कई समितियों को राज्य स्तरीय सम्मान मिला है। जगदीश चंद गहलोत ने बताया कि प्रशासनीय कारोबार के लिए किसान सेवा सहकारी समिति हल्दौर को पिछले साल प्रधानमंत्री राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। जिले की समिति किसानों को 10 प्रतिशत तक लाभांश देती हैं। लेकिन अब समितियों का कामकाज कर्मचारियों की कमी से प्रभावित हो रहा है। कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति बढ़ी है। नियुक्ति कम हो रही हैं, सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।
भुलाया नहीं जाएगा डॉ. नेमीशरण सिंह का योगदान
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स्योहारा। स्वर्गीय डॉ. नेमीशरण सिंह का नाम जिले के सहकारिता आंदोलन में प्रमुखता से लिया जाता है। अपने जीवन काल में अनेक बार जनसंघ व भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष रहे। वे भारतीय जनता पार्टी सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रहे। भूमि विकास बैंक के प्रदेश डायरेक्टर भी रहे। 1942 में आजादी के सत्याग्रह आंदोलन में जेल गए। महात्मा गांधी हत्या कांड के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध लगने पर भी उन्हें जेल भेजा गया। 1975 में आपात काल के दौरान वे 22 माह तय जेल में बंद रहे। बाबरी मस्जिद के ध्वस्त के समय तथा गोरक्षा आंदोलन में भी वे छह छह माह जेल में रहे। पहली बार भाजपा सरकार बनने पर उन्होंने 1980 में स्योहारा विधान सभा क्षेत्र तथा 1989 में अफजलगढ़ से भाजपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा। उन्होंने 1947 में ऋषिकुल हरिद्वार से बीआईएमएस पास किया। उनका जन्म 13 जुलाई 1924 तथा मृत्यु 09 फरवरी 2016 को हुई।
जिले में संचालित सहकारी समिति
समिति संख्या
किसान सेवा सहकारी समिति 288
दुग्ध सहकारी समिति 601
वेतन भोगी समिति 96
गन्ना सहकारी समिति 10
सहकारी साधन समिति 29
हथकरघा व वस्त्रोद्योग 118
खादी ग्रामोद्योग 89
मत्स्य समिति 14
उद्यान समिति 23
अन्य समिति 15
नोट : आंकड़े सहकारिता विभाग से लिए गए हैं।