खनन के पट्टे स्टोन क्रशरों को मिलने की उम्मीद
बिजनौर। बिजनौर जिले में वैसे तो बालू मोरंग का स्टोन क्रशर पर पहले से ही भंडारण हो रहा है। इस उद्योग से जुड़े लोगों को अब यह आस जगने लगी है कि नदियों के खनन के पट्टे भी स्टोन क्रशर के स्वामियों को हो जाएंगे। उत्तराखंड राज्य में यह व्यवस्था लागू हो गई है। इसके बाद स्टोन क्रशर स्वामियों को भी बालू अन्य लोगों से खरीदने की जगह सस्ता मिलने लगेगा।
जिले में भागूवाला, अफजलगढ़ व रायपुर सादात में 32 स्टोन क्रशर लगे हैं। इन क्रेशरों के लिए खनन के कारोबारियों से रेत व बजरी खरीदना पड़ता है। खनन के कारोबारी मनमाफिक दामों में रेत, बजरी स्टोन क्रशर पर देते हैं। स्टोन क्रशर पर ही रेत व बजरी का भंडारण हो रहा है। कैबिनेट की बैठक में भी अब इस पर मोहर लग गई है। और कहा गया है कि बालू मोरंग का भंडारण स्टोन क्रशर पर ही होना चाहिए। स्टोन क्रशर स्वामियों को इस नए आदेश से इस बात की आस जगी है कि उनके नजदीक पड़ने वाली नदियों के खनन के पट्टे स्थानीय क्रशर के स्वामियों को मिल जाएंगे ताकि वह नदियों से बालू, मोरंग का मनमाफिक भंडारण कर सकेंगे।
उत्तराखंड में यह व्यवस्था लागू हो गई है। उत्तराखंड को देखते हुए यहां भी यह व्यवस्था लागू होने की उम्मीद जगी है। खनन के पट्टे हथियाने को लेकर तमाम बड़े माफिया सक्रिय हैं और पट्टे हासिल करने के लिए जोड़तोड़ करने में जुटे हैं। खनन के पट्टों पर रोक के कारण किसी को पट्टे नहीं मिल रहे हैं। पिछले दिनों सरकार ने पट्टे देने को मंजूरी दी थी। इसके कड़े नियम लागू किए थे। जिले में किसी को भी खनन का पट्टा अभी नहीं दिया गया है। स्टोन क्रेशर के कारोबार से जुड़े चांदपुर के आदित्य बंसल समेत कई व्यापारियों का कहना है कि स्टोन क्रशर को वैसे तो पहले से ही बालू व मोरंग का भंडारण हो रहा है। सरकार ने नई व्यवस्था क्या की है इसका स्पष्ट आदेश आने के बाद ही पता चल पाएगा। इस आदेश के बाद ही उन्हें खनन के पट्टे मिलने की उम्मीद जगी है।