बिजनौर। वन्य जीवों के दृष्टिगत अमानगढ़ पर्यटकों के लिए बेहद रोमांचक बन चुका है। हाल ही में हुई वन्य जीव गणना के दौरान रोमांचित करने नजारा सामने आया। यहां बाघ, हिरण, भालू, हाथी और सांपों का राजा कोबरा की चहलकदमी देखने को मिली। बाघ गणना के लिए लगाए गए ट्रैप कैमरों में भी इन वन्य जीवों की मौजूदगी दिखी तो पर्यटक भी उत्साहित हैं।
अमानगढ़ के जंगल में हर तरह का वन्य जीव देखा जा रहा है। 9500 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस क्षेत्र में हर रोज बाघ और हाथी भी आसानी से दिख जाते हैं। ऐसे में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग ने जंगल में बाघों की गणना के लिए ट्रैप कैमरे लगाए थे। इन कैमरों से लिए गए फोटो और डाटा के आधार पर गणना की जानी थी। जब डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने फोटो देखे तो वह चौंकाने वाले थे।
n बिजनौर में 50 हजार हेक्टयर में है वन क्षेत्र
बिजनाैर जिले में करीब 50 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र है, जो अपने आप में बहुत विशाल है। इसमें से अकेले साढे़ नौ हजार हेक्टेयर से ज्यादा अमानगढ़ वन रेंज में हैं।
इसके अलावा नगीना, बढ़ापुर, साहूवाला, कौड़िया रेंज के पास हैं। इनमें सौ से ज्यादा एशियाई हाथी अमानगढ़ में हैं। इसके अलावा इतने ही नजीबाबाद वन डिविजन में हैं।
डाटा में गड़बड़ी, दोबारा हो रही बाघों की गणना
पिछले साल ट्रैप कैमरे लगाकर बाघों की गणना होनी थी, लेकिन डाटा में गड़बड़ी से यह पूरी न हो सकी। इस समय फिर से अमानगढ़ में करीब 15 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, जिससे बाघों की गणना हो रही है। वन अफसरों के मुताबिक इस बार बाघों की संख्या 35 तक पहुंच सकती है। आंकड़ों की बात करें तो कैमरों में 30 से ज्यादा बाघ, 23 गुलदार, पांच भालू के अलावा दर्जनों हाथी, हिरण, जंगल कैट समेत कई जानवर दिखाई दिए।
दुर्लभ प्रजाति के लकड़बग्घे की मौजूदगी उत्साहजनक
अमानगढ़ के एरिया के पास में सफेद धारी वाले लकड़बग्घे भी मिले थे। ये दुर्लभ प्रजाति के होते हैं। पांच साल पहले किसी वाहन की चपेट में आकर एक लकड़बग्घे की मौत हो गई थी। तब पहली बार यहां लकड़बग्घा होने का पता चला था। इसके बाद पिछली दो बार की गणना में जंगल में इसकी तस्वीर भी ट्रैप कैमरों से ली गई। जिससे इसकी मौजूदगी पुष्ट हो गई।