जिले में कई मकान जर्जर हालत में हैं खड़े
बिजनौर। जिले में कई खस्ताहाल भवन आज भी खड़े हैं। इनकी शिकायत होने के बाद भी केवल जांच की बात कहकर मामले की इतिश्री कर ली जाती है। कभी किसी भवन की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की गई है। हाल यह है कि इन भवनों में परिवार तो रह ही रहे हैं, सहकारी कार्यालय भी चल रहे हैं।
जिलेवासियों को आज भी कड़ी वाले कच्चे मकानों से निजात नहीं मिली है। जिले में राजकीय इंटर कॉलेज अंग्रेजों के जमाने का बना हुआ है। निष्प्रयोज्य घोषित हो चुका है। इसके अलावा मुख्य बाजार में बना जिला सहकारी संघ का कार्यालय है, यह भवन भी अंग्रेजों के समय का बना हुआ है। भवन की छत जगह-जगह से उखड़कर गिरने लगी है। बारिश में छत टपकती है। लोक निर्माण विभाग ने इस भवन को प्रयोग करने लायक नहीं माना है। जिला मुख्यालय में शहर के पास की ही दो इमारतों के खिलाफ हर साल शिकायत की जाती है। बताया जाता है कि भीड़भाड़ वाले इलाके में बने यह भवन बहुत जर्जर हालत में हैं। इनकी रेलिंग तक गिरने लगी है। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
एक मंजिला भवन की जांच नगर पालिका व दो मंजिला या इससे ऊंचे भवन की जांच पीडब्लूडी द्वारा की जाती है। दोनों विभाग अपनी रिपोर्ट प्रशासन को दे देते हैं लेकिन इसके बाद आगे की कोई कार्रवाई नहीं होती है। कई जगह पर नगर पालिकाओं व गांवों में भी मकान जर्जर हालत में हैं।
वर्जन...
पीडब्लूडी के अधिशासी अभियंता सुनील सागर का कहना है कि अगर किसी भवन की जांच के लिए आदेश आता है तो उसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी जाती है।