डेढ़ दशक बाद भी चालू नहीं हो सकी मनकुआ माइनर
धामपुर। धामपुर में डेढ़ दशक पहले क्षेत्र में हरित क्रांति लाने के लिए बना कोटरा रजबहा आज तक चालू नहीं हो पाया है। रजवाहे में आज तक पानी की एक बूंद भी किसानों की फसलों की सिंचाई के लिए नहीं आई है।
सरकार ने करोड़ों की लागत से इस रजबहे को तैयार किया था। धामपुर में इसे मनकुआ माइनर के नाम से जाना जाता है। करोड़ों की लागत से तैयार माइनर को किसानों को अब तक कोई फायदा नहीं हो सका है। उम्मीद थी कि साल 2020 में सिंचाई विभाग की ओर से रजबहे के लिए आ रहे अवरोधों को दूर कर चालू करा दिया जाएगा। पर यह साल भी केवल सपना बनकर ही रहा।
गौरतलब है कि सपा राज में करीब डेढ़ दशक पहले प्रदेश की सिंचाई मंत्री रहीं अनुराधा चौधरी ने धामपुर तहसील क्षेत्र में हरित क्रांति लाने के लिए कोटरा नदी से मनकुआ माइनर को तैयार कराया था। किसानों की हजारों हेक्टेयर जमीन को अधिग्रहीत कर माइनर को निकाला गया था। लेकिन मामला तब बिगड़ गया था जब कुछ किसानों ने जमीन नहीं दी। इन किसानों का कहना था कि जमीन का मुआवजा अपेक्षा से कम दिया जा रहा है। इस माइनर को कई स्थानों पर संबंधित लोगों ने कब्जा कर निर्माण भी कर रखा है। कई बार किसानों ने माइनर को चालू कराने की मांग उठाई। पर सुनवाई नहीं हुई।
कोर्ट का जो आदेश होगा, पालन होगा: किसान
क्षेत्र के किसान राम कुमार सिंह, रघुवीर सिंह, नरेंद्र सिंह, तुकमान सिंह, घसीटा सिंह, कविराज, गजेंद्र सिंह ने बताया कि किसानों को अपने खेतों में माइनर निकलवाने से कोई दिक्कत नहीं थी। लेकिन विभाग की ओर से उन्हें जो मुआवजा दिया जा रहा है वह अपेक्षा से कम था। मुआवजे की मांग को लेकर कोर्ट में वाद विचाराधीन है। जो कोर्ट का आदेश होगा, उसका पालन होगा।
रजबहा चालू कराने का प्रयास होगा: एसडीएम
उप जिलाधिकारी धीरेंद्र सिंह का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। इस मामले में विभागीय अधिकारियों से वार्ता कर माइनर को पूरी तरह से तैयार कराकर चालू कराने का भरपूर प्रयास किया जाएगा।