पूर्व विधायक व सांसद स्व.मंगलराम प्रेमी।
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पशु बेचकर मंगलराम प्रेमी ने लड़ा था चुनाव
अचल चौधरी
बिजनौर। भले ही इस समय चुनावी मैदान में उतरने के लिए अब नेताओें को करोड़ों रुपये खर्च करना पड़ता हो, लेकिन एक दौर में चुनाव लड़ने के लिए पैसा नहीं होता था। जनता दल के टिकट पर नगीना से विधायक चुने गए मंगलराम प्रेमी के साथ भी ऐसा ही हुआ। चुुनावी खर्च की खातिर उन्होंने अपने 11 पशु बेच दिए थे। चार हजार रुपये में पशु बिके तो चुनाव लड़ने लायक पैसा जमा हो सका था।
साल 1974 में नगीना विधानसभा सीट आरक्षित कर दी गई थी। तब कांग्रेस के टिकट पर गंगा देई नगीना से विधायक बनी। इसके बाद चौधरी चरण सिंह और अन्य नेता कांग्रेस के खिलाफ लामबंद हो गए। गठबंधन की ओर से नगीना की सीट जनता दल के खाते में गई। साल 1977 में चौधरी चरण सिंह ने जनता दल से मंगलराम प्रेमी को टिकट दिया। उस वक्त जनता दल के कोटे से नगीना के रहने वाले निसार अहमद एमएलसी हुआ करते थे।
एमएलसी निसार अहमद के करीबी रहे चौधरी अमन सिंह बताते हैं कि टिकट मिलने के बाद साल 1977 में मंगल राम प्रेमी निसार अहमद के घर पहुुंचे। उस वक्त दयानंद इंटर कॉलेज के प्रबंधक चौधरी अमन सिंह और मुशर्रफ भी वहां मौजूद थे। निसार अहमद के घर पहुंचते ही मंगल राम प्रेमी जमीन पर ही बैठ गए। एमएलसी निसार अहमद के करीबी रहे चौधरी अमन सिंह बताते हैं कि एमएलसी निसार अहमद ने मंगलराम प्रेमी से पूछा कि चुनाव लड़ने के लिए तुम्हारे पास क्या है। जिस पर मंगलराम प्रेमी ने कहा कि मेरे पास कुछ नहीं, केवल 11 पशु है। चुनाव लड़ने के लिए पैसा जरूरी था। इस पर एमएलसी निसार अहमद ने चौधरी अमन सिंह और मुशर्रफ को मंगलराम प्रेमी के घर पशु बेचने के लिए भेजा। चौधरी अमन सिंह और मुशर्रफ ने एक खरीदार ढूूंढकर 11 पशु बेच दिए। पशुओं के बेचने की एवज में चार हजार रुपये मिले थे। इन चार हजार रुपये से विधानसभा का चुनाव लड़ा गया। आखिरकार मंगलराम प्रेमी को इस चुनाव में जीत मिली। दयानंद इंटर कॉलेज के प्रबंधक चौधरी अमन सिंह बताते हैं कि इस चुनाव में जीत के बाद ही मंगलराम प्रेमी राजनीति की सीढ़ी चढ़ते चले गए। बाद में मंगलराम प्रेमी दो बार बिजनौर संसदीय क्षेत्र से सांसद भी बने। (संवाद)