गजरौला शिव। कभी बरसात के दिनों में विशाल जलधारा के रूप में बहने वाली मालन नदी अब धीरे-धीरे नाले में तब्दील होती जा रही है। नदी के दोनों किनारों पर बढ़ते अतिक्रमण और सफाई के अभाव में इसका प्राकृतिक स्वरूप लगातार सिमट रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश होने पर ही मालन में पानी आता है और तब यही नदी नजीबाबाद से लेकर रावली तक तबाही का कारण बनती है।
बिजनौर-मंडावर मार्ग के पास मालन नदी की चौड़ाई लगातार कम हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जहां नदी का फैलाव काफी अधिक था, वहीं अब कई स्थानों पर इसका स्वरूप नाले जैसा दिखाई देने लगा है। तेज बारिश के दौरान पानी को पर्याप्त रास्ता नहीं मिल पाता और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। यदि समय रहते नदी की सफाई, अतिक्रमण हटाने और टूटी पालट की मरम्मत नहीं कराई गई, तो इस बार बरसात में नजीबाबाद से लेकर रावली तक के कई गांवों को जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
पुराने रपटे के गोले कूड़े-कचरे से अटे
मालन नदी पर बने पुराने रपटे के नीचे बने गोले कूड़े-करकट और मिट्टी से भरे पड़े हैं, गोले से ऊपर रेत के टीले नजर आ रहे हैं। बरसात के दौरान बहकर आने वाला कचरा और कई बार मृत पशु भी इनमें फंस जाते हैं। यह जल निकासी में बाधा बन रहे हैं।
टूटी पालट से नई पुलिस लाइन में भरता है पानी
वर्ष 2022 में नदी के दोनों किनारों पर बनाई गई पालट पानी के तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गई थी। इससे बरसात का पानी नई पुलिस लाइन की ओर निकल जाता है, जिससे जलभराव की समस्या पैदा होती है।
2022 में मुख्यमंत्री के आगमन से पहले हुई थी सफाई
जून 2022 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन और नई पुलिस लाइन के उद्घाटन से पहले मालन नदी की सफाई कराई गई थी। ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत के सहयोग से दोनों किनारों पर दस-दस मीटर चौड़ी पालट बनाई गई थी लेकिन चार साल बाद स्थिति फिर पहले जैसी होती नजर आ रही है। नदी में दोबारा अतिक्रमण शुरू हो गया है।
नदी का रास्ता चौड़ा होगा तो बाढ़ का खतरा घटेगा
पूर्व प्रधान महेंद्र सिंह का कहना है कि मालन का प्राकृतिक रास्ता जितना चौड़ा होगा, पानी उतनी ही आसानी से निकलेगा। इससे गांवों और खेती की जमीन में जलभराव की समस्या भी कम होगी।
स्थानीय निवासी ठाकुर सिंह बताते हैं कि करीब 50-60 साल पहले मालन नदी की चौड़ाई एक किलोमीटर से भी अधिक थी, लेकिन अब यह काफी सिकुड़ गई है।
गजरौला अचपल गुरुद्वारा के प्रधान सरदार तेजपाल सिंह का कहना है कि नदी की सफाई कराई जानी चाहिए और टूटी पालट की मरम्मत कराई जानी चाहिए, ताकि नई पुलिस लाइन और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव न हो।
सुरेंद्र सिंह के अनुसार पुराने रपटे के गोलों में फंसे कूड़े और मिट्टी की सफाई मनरेगा मजदूरों के माध्यम से कराई जा सकती है। साथ ही हर वर्ष पालट पर मिट्टी डालकर उसे मजबूत किया जाना चाहिए।