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Bijnor News: शायरी की स्मृति छोड़ पंचतत्व में विलीन हुए महेंद्र अश्क

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संवाद न्यूज एजेंसी
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नजीबाबाद। अब यहां लौट के कौन आएगा, तुम साथ चलो... के रचयिता महेंद्र आशिक को नम आंखों से साहित्यकारों, समाजसेवियों और नागरिकों ने विदाई दी। देश-विदेश में मुशायरा और साहित्यिक मंचों को रौनक देने वाले शायर महेंद्र अश्क पंचतत्व में विलीन हो गए।
सिद्धबली विहार स्थित पुत्र विपिन त्यागी के आवास पर शनिवार को उर्दू के दानिश्वर मशहूर शायर महेंद्र अश्क ने अंतिम सांस ली। रविवार को हरिद्वार में गंगा घाट पर उन्हें पंचतत्व में विलीन किया गया। नगर को देश-विदेश में पहचान दिलाने वाले उर्दू जबान के माहिर महेंद्र अश्क को सिद्ध विहार कॉलोनी में पहुंच कर साहित्यकारों, सामाजिक, राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों और नागरिकों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
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जिला पंचायत सदस्य अमर सिंह, ब्लॉक प्रमुख तपराज सिंह, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मोअज्जम खां एड., डॉ. एसके जौहर, राजीव अग्रवाल, साहित्यकार राजेंद्र त्यागी, इंद्रदेव भारती, शेख नगीनवी, बेगराज सिंह, डॉ. प्रदीप डेजी, मुकेश सिन्हा, तसनीम सिद्दीकी ने महेंद्र इश्क के आवास पर पहुंचकर उन्हें उच्च कोटि का शायर बताते हुए श्रद्धांजलि दी। हरिद्वार में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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शवयात्रा में राकेश चौधरी, राजेश मिश्रा राजू, नसीम अख्तर, शहबाज अख्तर, सुहेल शहाब शम्सी, केशव अग्रवाल, अमित सिंघल, मौलाना अकरम सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे।
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