नूरपुर क्षेत्र के गांव आलमपुरी में पंचतत्व में विलीन होते लोकेंद्र और जमा भीड़।
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बिजनौर में विधायक लोकेंद्र चौहान को क्या मालूम था कि जिस भूमि को वह मकान बनाने के लिए खरीद रहे हैं एक दिन उसमें उनकी चिता जलेगी। 11 बीघा जमीन विधायक ने घर के पास मकान बनाने के लिए खरीदी थी। इस जमीन में ही बृहस्पतिवार को उनकी चिता जलाई गई।
विधायक लोकेंद्र चौहान का गांव आलमपुरी में जहां पैतृक मकान है, वहां गाड़ी के आने जाने में परेशानी होती है। घर के पास मकान बनाने के लिए 11 बीघा जमीन खरीदी थी। विधायक लोकेंद्र चौहान अपने समर्थकों से कहा करते थे कि खरीदी गई जमीन में वह महल जैसा मकान बनाएंगे। विधायक कहीं भी हों पर रात में वह अपने गांव में घर जाना पसंद करते थे।
विधायक लोकेंद्र चौहान की हादसे में मौत के बाद पिता महेशचंद चाहते थे कि लोकेंद्र का अंतिम संस्कार उनकी दादी की समाधि के पास खेत में हो और वहीं लोकेंद्र की भी समाधि बने। पर लोकेंद्र के बड़े भाई सीपी सिंह ने दादी की समाधि के पास लोकेंद्र चौहान का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। उन्होंने मकान के लिए खरीदी गई जमीन में विधायक का अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया। सीपी सिंह ने कहा कि खेत में समाधि बनने से देखभाल नहीं हो पाएगी। लोकेंद्र चौहान जनता के सच्चे सेवक थे। उनकी याद जनता के दिल में रहनी चाहिए। इसलिए घर के लिए खरीदी गई जमीन में उनका अंतिम संस्कार किया गया और यहीं उनकी समाधि बनेगी।