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लोकेंद्र चौहान को याद कर फफक पड़े लोग

Thu, 22 Feb 2018 11:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
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विधायक को श्रद्धांजलि देते भाजपाई। - फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में गांव आलमपुरी अपने नेता के शोक में डूबी थी़। श्रद्धांजलि देने वालों की लंबी लाइन और रोते बिलखते लोग । कुछ ऐसा नजारा था ,दुर्घटना में दिवंगत हुए विधायक लोकेंद्र चौहान के आवास का। 
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सबेरे नौ बजे जब यह पत्रकार लोकेंद्र चौहान के गांव पहुंचा तो पुलिस व्यवस्था बनाने में लगी थी। गांव से पहले चौराहे पर ट्रैफिक रोक कर वाहनों को एक साइड भेजा जा रहा था। गांव जाने वाला रास्ता प्रमुख व्यक्ति और प्रशासनिक अधिकारियों ही लिए खुला था। यहीं साइड में हैलीपैड बना था। घर के अंदर जाने के रास्ते को रस्सी से दो भागों में बांट दिया गया था। एक रास्ते से अपने प्रिय नेता के पार्थिव शरीर के दर्शन कर श्रद्धा सुमन करने वालों की भीड़ प्रवेश कर रही थी तो दूसरे भाग से श्रद्धा सुमन अर्पित करने वालों का बाहर आना जारी था। 
लोकेंद्र चौहान का शरीर घर के प्रांगण में डीप फ्रिजर में रखा हुआ था। दाईं साइड के बरामदे में बैठा परिवार और परिचित महिलाएं रो रही थी। काफी महिलाएं डीप फ्रिजर की एक साइड में भी बैठी थी। श्रद्धांजलि देने वाले पंक्ति में आ रहे थे और लोकेंद्र चौहान के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर आगे बढ़ते जा रहे थे। उनकी साइड में बड़े भाई सीपी सिंह खड़े होकर आने वालों का प्रणाम स्वीकार कर रहे थे। आने वालों में सपा नेता शेख सुुुलेमान, पूर्व राज्य मंत्री और सपा नेता स्वामी ओमवेश, पूर्व राज्य मंत्री मूलचंद चौहान भी शामिल रहे। 
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12 बजे शुरू हुई विधायक की शवयात्रा
करीब दस बजे लखनऊ से प्रदेश सरकार के मंत्री एवं भाजपा नेताओं को लेकर हेलीकाप्टर आ गया। नेताओं की आवाजाही बढ़ गई। करीब 12 बजे शव यात्रा शुरू हुई। लोकेंद्र चौहान का शव भाजपा के ध्वज में लिपटा था।  कुछ युवा डंडो में लोकेंद्र चौहान के झंडे लिए चल रह थे। नेतागण तो यही से मंच स्थल की और बढ़ गए किंतु शव यात्रा पूरे गांव से घूम मंच स्थल पर पहुंची। अंतिम संस्कार स्थल पर हजारों की भीड़ जमा थी। हालांकि आज   गर्मी थी। धूम परेशान करने वाली था किंतु जो भी आया वह मुखाग्नि के  बाद ही हटा। अंतिम संस्कार वाले प्लाट पर ही नहीं लोकेंद्र के परिवार के दुख में शामिल होने वाले खेत की डौल, आसपास के खेतों में या सड़क के किनारे जमे रहे। लोगों के चेहरों पर अपने नेता के जाने का दुख साफ    नजर आ रहा था। समर्थकों की हालत कुछ इस तरह की नजर आई जैसे   कि उनका अभिभावक उन्‍हें छोड़कर चला गया हो।
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