बैंकों पर लटके ताले
बिजनौर। मांगों को लेकर राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी शुक्रवार को हड़ताल पर रहे। दो दिन की हड़ताल के पहले दिन राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं पर ताले लटके रहे। बैंक कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। एटीएम में बृहस्पतिवार को रुपये रखे जाने से उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशानी नहीं उठानी। बैंकों में हड़ताल से करीब 120 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ है।
एसबीआई, पीएनबी, इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, बैंक ऑफ इंडिया, आंध्रा बैंक, केनरा बैंक आदि राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं में ताले लटके रहे। बैंक आए उपभोक्ताओं को लौटना पड़ा। हालांकि बैंकों द्वारा बृहस्पतिवार शाम एटीएम में करेंसी रखी गई थी। इससे उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ी। यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले ओबीसी बैंक पर बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। संगठन के जिला सचिव सौरभ गुप्ता ने बताया कि बैंक कर्मचारियों का वेतन समझौता आईबीए व केंद्र सरकार की ढुलमुल नीतियों के कारण लंबित है। सरकार ने अगर उनकी मांगें न मानीं तो एक अप्रैल से देश के सभी बैंक कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर चले जाएंगे। इस दौरान हेमराज सिंह, सचिन कुमार, अमित गुप्ता, सरोवरलाल, जीएन त्रिपाठी, नरेश सिंह, अमित कुमार आदि मौजूद रहे।
कर्मचारियों ने निकाला जुलूस
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन के बैनर तले कर्मचारी एसबीआई की मुख्य शाखा पर एकत्र हुए। बैंक कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते मुख्य सड़क पर जुलूस निकाला। वक्ताओं ने कहा कि जब सरकार को आर्थिक परेशानी उठानी पड़ती है तो उसे बैंककर्मी याद आते हैं लेकिन उनके हितों का कोई ध्यान नहीं रखा जाता है। सभी ने दो दिन की हड़ताल को सफल करने का संकल्प लिया। इस दौरान अनिल विर्श्नोई, संदीप कुमार, सुमिरनपाल, हितेश कुमार, महेश कुमार, जीके शर्मा, नौबहार सिंह, संजय गुप्ता, विनीता, मीनाक्षी अग्रवाल, श्रीराम चौधरी आदि मौजूद रहे।
ये रहीं प्रमुख मांगें
- दसवां वेतन समझौता लागू हो।
- सप्ताह में पांच दिवसीय बैंकिंग।
- पारिवारिक पेंशन में सुधार।
- मूल वेतन के साथ विशेष भत्ते का विलय।
- सेवानिवृत्त लाभों पर आयकर से छूट।