- गंभीर मरीजों को मेडिकल अस्पताल में नहीं मिल पाता उपचार
- बीते छह माह में 350 मरीजों को किया गया रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। कोरोना काल में मेडिकल अस्पताल को मिले 17 वेंटिलेटर अब तक कई मरीजों के लिए जीवनदाता बन सकते थे। मगर वेंटिलेटर संचालित न होने के कारण यहां आने वाले गंभीर रोगियों को रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में मेरठ ले जाते समय इनमें से न जाने कितने दम तोड़ देते हैं।
बीते छह माह के आंकड़े को देखें तो मेडिकल अस्पताल से 350 गंभीर मरीजों को रेफर किया गया है। इनमें से अधिकांश मेरठ अस्पताल में जाते हैं। करीब 80 किलोमीटर की दूरी और जाम कई मरीजों की जान ले लेते हैं। यदि मेडिकल अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा होती तो कई मरीजों की जान बच सकती थी।
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तैनात किया जाए संचालन करने वाला स्टाफ
गजरौला शिव : जिले के निवासी मेडिकल अस्पताल में रखे 17 वेंटिलेटर को संचालित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन्हें संचालित करने वाले स्टाफ की तैनाती की जाए ताकि जिले वासियों को इनका लाभ मिल सके।
-तुरंत मिलनी चाहिए सुविधा : विनोद कुमार
स्वाहेड़ी निवासी राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार बिट्टू का कहना है कि मेडिकल अस्पताल में रखे वेंटिलेटर तुरंत चालू किए जाने चाहिएं। अगर हृदयघात के मरीजों को यहीं उपचार मिल जाए तो उनकी जान बच सकती है।
सुविधा मिले, रेफर न हों मरीज : महेद्र सिंह
गजरौला शिव निवासी महेंद्र सिंह के अनुसार गंभीर हालत में मरीजों को अस्पताल ले जाया जाता है, लेकिन वेंटिलेटर होने के बावजूद संचालन नहीं हो रहा। चिकित्सक मरीजों को केवल रेफर कर देते हैं।
मशीनें चलनी भी चाहिएं : रोहित
बिजनौर निवासी सीए रोहित का कहना है कि मेडिकल अस्पताल शुरू हो गया है। डाॅक्टरों की टीम भी आ गई है। रोगियों के लिए नई-नई मशीनें आ गई हैं, मगर उन्हें चलाने वाले मौजूद नहीं हैं। शासन को उन्हें संचालित करने वालों की तैनाती करनी चाहिए।
स्टाफ की व्यवस्था करनी चाहिए : साजिद
ग्राम नारायणपुर निवासी साजिद चौधरी का कहना है कि दिल का दौरा पड़ने वाले मरीजों को अस्पताल की इमरजेंसी में ले जाया जाता है। डाक्टर ऐसे मरीजों को तुरंत रेफर कर देते हैं। अस्पताल में मौजूद वेंटिलेटर को चालू कर रोगियों को लाभ दिया जा सकता है।