यह जमीन छोड़कर कहा जाएं, चैन तो आसमां में भी नहीं...
नजीबाबाद। अदबी संस्था तहजीबुल अखलाक की ओर से एक शाम अनवर बिजनौरी के नाम से मुशायरा आयोजित हुआ। देश के वर्तमान हालत पर शायरों ने कलाम पेशकर खूब वाहवाही लूटी।
अदबी संस्था तहजीबुल अखलाक की ओर से आयोजित मुशायरा की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर महेंद्र अश्क ने की। इम्तियाज अजहर की नात-ए-पाक से मुशायरे का आगाज हुआ। महेंद्र अश्क ने कहा कि यह जमीं छोड़ कर कहां जाएंगे, चैन तो आसमान में भी नहीं। अनवर बिजनौरी ने कहा कि किसी के बस में न खुद अपने इख्तियार में हूं, वो आके जा भी चुका जिसके इंतेजार में हूं। डॉ. आफताब नोमानी ने कहा कि किस से इंसाफ की करें उम्मीद, बंद दरवाजा है अदालत का। शनावर किरतपुरी ने कहा कि पहले उसकी गोद में दो-चार फल आने तो दो, खुद ब खुद मगरूर शाखों में लचक आजाएगी। कारी शुएब ने कहा कि एक बेकस बेवा की लूटी थी आबरू, बिक गई है उस अमीरे शहर की दस्तार तक। कारी शुएब के संयोजन और मेराज बिजनौरी संचालन में आयोजित मुशायरे में मरगूब रहमानी, खुर्शीद बिजनौरी, साजिद सागर, नदीम साहिल, डॉ. इलियास अंसारी, डॉ. अतीक दानिश, डॉ. साबिर, मुशब्बर हुसैन आदि ने भी कलाम पेशकर खूब वाहवाही लूटी। इस अवसर पर अनेक श्रोता मौजूद रहे।