आजादी के लिए नौकरी छोड़ी, जेल गए और ‘गांधी’ हो गए
बिजनौर। आजादी के आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी 19 अक्तूबर 1929 को विजय दशमी के दिन धामपुर आए। जनपद ही नहीं, जनपद के आसपास के लोगों में भी वह आजादी के आंदोलन की चिंगारी फूंक गए। जनपद के आजादी के आंदोलन के एक सिपाही अब्दुल लतीफ को जेल प्रवास के दौरान उनके साथी रहे पंडित जवाहर लाला नेहरू ने उन्हें गांधी कहना शुरू कर दिया और वे गांधी के नाम से प्रसिद्ध हो गए।
पुलिस की नौकरी से त्यागपत्र देकर आजादी की कूदने वाले बिजनौर के अब्दुल लतीफ के अब्दुल लतीफ गांधी बनने की भी रोचक कहानी है। अब्दुल लतीफ गांधी पुलिस में सब इंस्पेक्टर थे। नौकरी के दौरान देश आजाद कराने और कांग्रेस पार्टी केेे लोगों से इनके संबंध बन गए। उनकी सहानुभूति आजादी के लिए आंदोलन करने वालों से होने लगी। वे इन्हें चंदा देने लगे। गुप्तचरों की सूचनाएं उनके अधिकारियों को आने लगीं। इनका परिवार बहुत संपन्न परिवार था। पिता के संबंधों के कारण सरकार ने इन्हें नौकरी से नहीं निकाला, किंतु तबादले करने शुरू कर दिए। इन्होंने अपने पिता मौलाना अब्दुल हई से नौकरी छोड़ने की इच्छा जाहिर की। परिवार नहीं चाहता था, किंतु उन्होंने नौकरी से त्याग पत्र दे दिया और आजादी के आंदोलन में कूद पड़े। आजादी के लिए चल रहे आंदोलन में वे कई बार जेल भी गए। जेल में उन्हें मौलाना अब्दुल कलाम आजाद और पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ रहना पड़ा। एक ही कोठरी में इन्हें लंबे समय तक रखा गया।
अब्दुल लतीफ गांधी के पौत्र बिजनौर नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन फरीद अहमद बताते हैं कि मौलाना आजाद उनके दादा अब्दुल लतीफ को ख्वाजा बिजनौरी कहते थे। पंडित नेहरू उन्हें महात्मा गांधी कहकर पुकारते थे। ख्वाजा बिजनौरी नाम तो ज्यादा नहीं चला किंतु समर्थक और मिलने वाले उन्हें गांधी कहने लगे। यहां नाम चल पड़ा और वे अब्दुल लतीफ गांधी हो गए। सब उन्हें प्यार से गांधी जी कहते। वे बताते हैं कि उनके दादा उत्तर प्रदेश में दो बार एमएलए और एक बार एमपी भी रहे। फरीद अहमद बताते है कि गांधी जी ने स्वयं उनके दादा जी को चरखा दिया था। वह उनके परिवार की लंबे समय तक धरोहर रहा। बाद में उसे गांधी संग्रहालय को दे दिया गया।
शिवचरण त्यागी ने गांधी जी के पुत्र की हिंदू धर्म में वापसी कराई
फोटो समाचार
पैजनियां के शिव चरण सिंह त्यागी ने इस्लाम ग्रहण कर चुके महात्मा गांधी के पुत्र को हिंदू धर्म में लाने के लिए काम किया। शिवचरण सिंह त्यागी के नवासे प्रसिद्ध साहित्यकार भोला नाथ त्यागी बताते हैं कि उनके नाना के क्रांतिकारियों से बहुत ही अच्छे संबंध थे। आजादी के आंदोलन में कई प्रसिद्ध क्रांतिकारी उनके गांव पैजनियां में आकर काफी समय रुके। आजादी के बाद उन्होंने कोई सरकारी सुविधा आजीवन ग्रहण नहीं की। महात्मा गांधी के पुत्र हीरालाल कुछ लोगों के प्रभाव में आकर मुस्लिम बन गए थे। महात्मा गांधी की पत्नी कस्तूरबा और उस समय के देश के बडे़े उद्योगपति जमना लाला बजाज के कहने पर शिवचरण त्यागी ने हीरालाल से संपर्क किया। उन्हें अपने संपर्क में लिया। उनका मस्तिष्क बदला। प्रयास कामयाब हुआ, इसके बाद हीरालाला वापस हिंदु धर्म में आ गए, किंतु यह ज्यादा न चला। हीरा लाल फिर अपने पुराने रास्ते पर चले गए।
मौ.अब्दुल लतीफ।- फोटो : BIJNOR