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कानून मंत्री अजीजुर्रहमान बीच रास्ते में ही गाड़ी छोड़ चल पड़े थे पैदल

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नगीना में मंत्री अजीजुर्रहमान को फूल लगाते शिक्षाविद परवेज आदिल माही। (फाइल फोटो) - फोटो : BIJNOR
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कानून मंत्री अजीजुर्रहमान बीच रास्ते में ही गाड़ी छोड़ चल पड़े थे पैदल
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अचल चौधरी
बिजनौर। जनप्रतिनिधि हो तो अजीजुर्रहमान जैसा। करीब 38 साल बाद भी अजीजुर्रहमान का किस्सा लोगों की जुबान पर आज भी है। दरअसल साल 1984 मेें कांग्रेस की सरकार में नारायण दत्त तिवारी सीएम हुआ करते थे। नारायण दत्त तिवारी ने इस्तीफा दिया तो विधानसभा भंग हो गई। सरकार में विधि एवं न्याय मंत्री रहे अजीजुर्रहमान को यह खबर रेडियो पर मिली तो तुरंत ही सरकारी गाड़ी से उतर गए। ड्राइवर ने खूब कोशिश की लेकिन अजीजुर्रहमान गाड़ी में नहीं बैठे। बाद में गांववालों ने बैलगाड़ी से मुख्य मार्ग तक विधि मंत्री को छोड़ा
नगीना के रहने वाले विधायक अतीकुर्रहमान की मौत के बाद नगीना सीट पर उपचुनाव हुआ। साल 1973 में हुए उपचुनाव में अतीकुर्रहमान के भाई अजीजुर्रहमान विधायक बने। साल 1974 में नगीना सीट आरक्षित कर दी गई। जिसके बाद अजीजुर्रहमान बिजनौर विधानसभा सीट से साल 1974 में विधायक चुने गए। जोकि 1989 तक लगातार बिजनौर सीट से विधायक रहे।
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अजीजुर्रहमान के पड़ोसी परवेज आदिल माही बताते हैं कि मैं उन्हीं की गोद में पला बढ़ा हूं। उन्होंने आगे बताया कि अजीजुर्रहमान ईमानदारी की मिसाल थे। जोकि साल 1984 में देखने को भी मिली। उस वक्त उत्तर प्रदेश में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी थी। उसी सरकार में अजीजुर्रहमान विधि एवं न्याय मंत्री थे। साल 1984 में नारायण दत्त तिवारी ने इस्तीफा दे दिया तो विधानसभा भंग हो गई।
विधि मंत्री अजीजुर्रहमान सरकारी गाड़ी से नगीना के पास गांव खटाई में अपने दोस्त हाजी सादुल्ला के यहां गए हुए थे। खटाई गांव से चार किलोमीटर पहले ही मंत्री अजीजुर्रहमान को रेडियो से विधानसभा भंग होने की खबर मिली। इस पर उन्होंने तुरंत ही सरकारी गाड़ी रुकवा ली और नीचे उतर गए। मंत्री गाड़ी के ड्राइवर से बोले, अब न विधायक रहा न मंत्री, अब आप जाइए। सरकार खर्च पर अब मैं कुछ नहीं कर सकता। जिस पर ड्राइवर ने काफी मिन्नतें की लेकिन वे गाड़ी में नहीं बैठे। ड्राइवर ने कहा कि मुख्य मार्ग तक छोड़ दूं तो इस पर तैयार नहीं हुए और पैदल चल दिए। अजीजुर्रहमान को पैदल चलता देख गांव वालों ने बैल गाड़ी से उन्हें मुख्य मार्ग तक छोड़ा, जिसके बाद नगीना आए। अजीजुर्रहमान साल 1989 तक बिजनौर से विधायक रहे। साल 1974 में मुख्यमंत्री हेमतीनंदन बहुगुणा की सरकार में उन्हें उद्योग मंत्री बनाया गया था। (संवाद)
नहीं थे मकान बनाने को पैसे
परवेज आदिल बताते हैं कि जब अजीजुर्रहमान का इंतकाल हुआ तो रिश्तदार के मकान के एक छोटे कमरे में रहते थे। उनका मकान गिर गया था, जिसे बनाने के लिए पैसे नहीं थे। बता दें कि अजीजुर्रहमान के पिता हाफिज मोहम्मद इब्राहिम अविभाजित पंजाब के गवर्नर रहे हैं।
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मुलायम सिंह की कोठी से लौट आए थे वापस
परवेज आदि माही बताते हैं कि मुलायम सिंह ने मुख्यमंत्री रहते हुए नजीबाबाद के विधायक मास्टर रामस्वरुप से कहा था कि एमएलसी बनाना है, एक आदमी दो। जिस पर विधायक रामस्वरुप नगीना में अजीजुर्रहमान के घर पहुंचे और उन्होंने लखनऊ ले गए। जब गाड़ी मुलायम सिंह की कोठी में प्रवेश करने लगी तो अजीजुर्रहमान चौंक गए। उन्होंने मुलायम सिंह की कोठी में जाने से साफ इनकार कर दिया। और विधायक रामस्वरुप से बोले, मैं कांग्रेस नहीं छोड़ सकता, इसलिए एमएलसी भी नहीं बनूंगा।
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