पालना में सुंदर वस्त्रों से सजेंगे लड्डू गोपाल
बिजनौर। श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी विधिपूर्वक मनाने के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। भक्तों ने बाजार से लड्डू गोपाल, राधा कृष्ण की मूर्ति, पालना और वस्त्र की खरीदारी की। रविवार को दिन भर बाजार में लोगों का आवागमन लगा रहा। सोमवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत के लिए किराने से लेकर मूर्ति और वस्त्र वालों की दुकानें ग्राहकों से गुलजार रहीं।
प्रत्येक वर्ष भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस बार जन्माष्टमी का त्योहार 30 अगस्त, सोमवार को है। घरों और मंदिरों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां हो चुकी हैं। यहां पर लड्डू गोपाल की पोशाक और पीतल के लड्डू गोपाल, कान्हा जी की पोशाक से सजे दिखे। मान्यता है कि लड्डू गोपाल को जेवर पहनना बहुत पसंद था, इसलिए भक्त इस दिन हर वो चीज उनके आगे रखते हैं या उन्हें पहनाते हैं, जो भगवान कृष्ण जी को पसंद थी। मंदिरों को भी दुल्हन की तरह से सजाया गया है। अष्टमी के दिन जन्मे भगवान कृष्ण को विष्णु जी का ही अवतार माना जाता है। इस दिन भक्त पूरा दिन उपवास करते हैं और रात के 12 बजे तक भगवान कृष्ण जी का जागरण, भजन, पूजन-अर्चना करते हैं।
पंडित धर्मेश भारद्वाज के अनुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन भक्त अपने घरों में कान्हा जी का पालना सजाते हैं और उस पर उन्हें बैठाते हैं तथा उसे फूलों, गुब्बारों से सजाते हैं। कान्हा जी की फैंसी पोशाक पहनाते हैं तथा जेवर पहनाकर सजा कर पालने में झूलाते हैं। मान्यता है कि अगर निसंतान दंपती जन्माष्टमी का व्रत रखते हैं, तो बहुत जल्द ही उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है।