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अमानगढ़ वन रेंज में हथनी की मौत

Sun, 14 Oct 2018 11:30 PM IST
अमर उजाला/बिजनौर
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अमानगढ़ वन रेंज मृत हथिनी का शव। - फोटो : अमर उजाला
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रेहड़ में अमानगढ़ वन रेंज के कंपार्ट नंबर तीन में मादा हाथी का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। आनन फानन में पहुंचे वनाधिकारियों ने शव को कब्जे में लेकर मृत मादा हाथी का पीएम कराया। हथिनी का शव वन विभाग को सड़ी गली हालत में मिला। आशंका जताई जा रही है कि चार पांच दिन पहले मादा हाथी की मौत हुई है। घटना विभाग पूरी तरह से अनभिज्ञ रहा।
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हथिनी का शव मिलने से वन विभाग के गश्त के दावों की भी हवा निकल गई। वनाधिकारियों का कहना है कि पीएम रिपोर्ट के बाद ही हथिनी की मौत के कारणों का खुलासा होगा। मृत हथिनी के शरीर पर दो जगह हाथी के हमले के निशान हैं। संभवत: मेटिंग सीजन में अपने अधिकारी के लिए हाथी ने गुस्से में हथनी को मार गिराया। शनिवार की शाम वन गुर्जर जसपुर कंपार्ट संख्या तीन में अपने मेवशियों को चारने के लिए गए थे। तब उन्हें रेंज में पड़ा मादा हाथी का शव मिला। इसकी सूचना उन्होंने वन विभाग को दी। रविवार की सवेरे मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने मादा हाथी के शव को कब्जे में लेकर पीएम कराया। हालांकि वन कर्मी गश्त के दौरान हाथी के शव को देख लिए जाने का दावा कर रहे हैं। रेंजर राकेश कुमार शर्मा शनिवार शाम वन दरोगा कुलदीप सिंह, विजय सिंह, मनोज कुमार, नैन सिंह, श्रीपाल सिंह गश्त पर थे। इस बीच उन्हें मादा हाथी का शव दिखा। रविवार को शव मिलने की सूचना से वनविभाग में हड़कंप मच गया। टीम ने पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पीएम कराया। शव पूरी तरह सड़ चुका था। उसके शरीर पर गहरे जख्मों के निशान है। चिकित्सकों के अनुसार शव चार पांच दिन पुराना है। मौत के स्पष्ट कारण पीएम के बाद ही पता लगेगा। मौके पर एसडीओ हरि सिंह, जिम कार्बेट से रेंजर झिरना प्रशांत कुमार रहे।

 डेढ़ माह में दो हाथियों की मौत
रेहड़ क्षेत्र में अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के वनों में वन्यजीवों की सुरक्षा के दावों की पोल खुल गई है। डेढ़ माह में अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र में दो हाथियों के शव मिल चुके हैं। हालांकि वन विभाग के अधिकारी वन्यजीवों की सुरक्षा और गश्त किए जाने के दावे कर रहे है। उधर, पूर्व में भी 2016 से अब तक बिजनौर के वनक्षेत्र में बढ़ापुर में दो, भिक्कावाला में एक, मीरापुर में एक हाथी की मौत हो चुकी है। 
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वन विभाग नहीं है सजग
क्षेत्र में कार्बेट टाइगर रिजर्व व अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के वनों से निकलकर बड़ी संख्या में जीव किसानों के खेतों में खड़ी फसल को अपना निशाना बना रहे है। जिससे किसानों को जहां आर्थिक नुकसान हो रहा है। वहीं, वन विभाग की गश्त की शून्य साबित हो रही है। कल्लूवाला, मालोनी, लालबाग, छजमलवाला, धारा,मीरापुर, रानी नांगल, भिक्कावाला, जामनवाला, मुरलीवाला, चकफेरी, नवाबपुरा आदि पचासों गांवों के खेतों में आए दिन हिंसक जीव विचरण कर रहे है। जो कभी भी किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकते है। ग्रामीणों अमनजीत सिंह, सरताज अली, मालन सिंह रावत, गुरबाज सिंह, कमसीन कुमार आदि का कहना है कि वन विभाग के न तो कर्मचारी ही नजर आते हैं और न ही कभी कोई वाहन ही यहां से गुजरकर वन्यजीवों को खेतों में आने से रोकता है।
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