बिजनौर। मिशन शक्ति अभियान के तहत डीडीपीएस की कक्षा 11 की छात्रा कृतिका अग्रवाल ने एक दिन के लिए कोतवाल बनीं। इस दौरान उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली को जाना, थाने में फरियादियों की समस्याएं भी सुनीं और दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराने के निर्देश दिए। कृतिका कहती हैं कि अब उन्होंने पुलिस को केवल वर्दी में देखा था। पुलिस को नजदीक से देखने का अनुभव जीवन में आगे भी काम आएगा।
गंज निवासी आशुतोष अग्रवाल की बेटी कृतिका डीडीपीएस में हाईस्कूल में सेकेंड टॉपर रही थीं। कृतिका को 97.2 प्रतिशत अंक मिले थे। पिता की गंज में किराना की दुकान है। मिशन शक्ति अभियान के तहत कृतिका को शहर कोतवाल बनाया गया। शुक्रवार को दोपहर 12 बजे कोतवाली में कृतिका ने चार्ज लिया व महिला हेल्प डेस्क पर बैठीं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी पीएचसी) झालू पर तैनात संजीव कुमार की पत्नी डा.चारूल मौर्य ने प्रार्थना पत्र दिया कि आठ अक्तूबर को उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। फोन करने वालों ने कहा कि एमेजन एप से बोल रहे हैं। इसके बाद उनके मोबाइल से गूगल वे एप यूपीआई के माध्यम से आठ बार में एक लाख 25 हजार रुपये निकाल लिए गए। इसकी शिकायत उन्होंने एसबीआई ब्रांच में की थी। उन्होंने साइबर क्राइम सेल में रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की। कोतवाल कृतिका ने रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद दयालकुंज निवासी धीरेंद्र कुमार की पुत्री के दहेज उत्पीड़न के मामले को उन्होंने सुना। कृतिका ने पुलिस परामर्श केंद्र में मामले को आपस में सुलझाने की धीरेंद्र व उनकी बेटी को सलाह दी। पर वे तैयार नहीं हुए और मुकदमा दर्ज कराने पर अड़ गए। कृतिका अग्रवाल ने मामले में भी दहेज एक्ट में मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए।
इसके बाद कृतिका ने शहर कोतवाली के डाक कक्ष व अन्य जगहों का निरीक्षण किया और पुलिस अफसरों के साथ शहर कोतवाली से शास्त्री चौक तक रूट मार्च किया। वापस आने के बाद कार्यालय में पूरे दिन फरियादियों की समस्याएं सुनीं और उनका निस्तारण कराया। इस दौरान एसपी डा.धर्मवीर सिंह, सीओ सिटी कुलदीप गुप्ता, शहर कोतवाल राजेश सोलंकी, कृतिका की मां शशि अग्रवाल समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे।
ऐसे किया गया कृतिका का चयन
कृतिका मिशन शक्ति अभियान के तहत शहर कोतवाली आई थीं। इस दौरान पुलिस ने देखा कि कृतिका अन्य छात्राओं में सबसे ज्यादा एक्टिव है। वह एक दिन की कोतवाल बनाने के योग्य है। इसलिए कृतिका को एक दिन का कोतवाल बनाया गया।
खाकी को कभी भी नजदीक से नही देखा था
कृतिका चिकित्सक बनकर लोगों की सेवा करना चाहती हैं। कृतिका कहती हैं कि उन्होंने पुलिस को बस खाकी वर्दी में दूर से देखा था। प्रदेश सरकार द्वारा बच्चों को एक दिन का अधिकारी बनाने से बच्चों में आत्मविश्वास जगेगा। इससे हर किसी को नया अनुभव मिलेगा। बच्चों को पता चलेगा कि जिन बातों से वे अनजान हैं वहां क्या चल रहा है। यह महिला सशक्तिकरण के लिए बहुत जरूरी है।