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जिसका अंतिम संस्कार किया, वो जिंदा लौटा

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युवक जिंदा.. परिजनों ने बेटे का शव बता
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कर दिया किसी और का अंतिम संस्कार
बिजनौर। धामपुर के एक व्यापारी ने दिल्ली में मिले एक शव की अपने बेटे पल्लव ऐरन के रूप में पहचान कर अंतिम संस्कार किया था, वह जिंदा निकला। साढ़े तीन माह बाद पुलिस ने बरामद कर लिया है। बताया जा रहा है कि पिता-पुत्र के बीच गहरे मतभेद थे। पल्लव लापता होने के बाद हरिद्वार में जा छिपा था और दो दिन पहले उसने अपने पिता को फोन कर बीस लाख रुपये मांगे। इसके बाद उसके पिता ने पुलिस को सूचना दी और पुलिस ने उसे हरिद्वार से दबोच लिया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
धामपुर में नगीना चौराहे पर अशोक कुमार अग्रवाल का होंडा का दुपहिया वाहनों का शोरूम है। उनका 42 साल का बेटा पल्लव एरन छह जुलाई को लापता हो गया था। उसकी तलाश की गई पर कोई पता नहीं चला। गुमशुदा की तलाश के इश्तिहार भी लगवा दिए गए। इस दौरान दिल्ली के रेलवे स्टेशन से एक शव बरामद हुआ। परिजनों ने शव की पल्लव एरन के रूप में पहचान की। 21 जुलाई को परिजनों ने पल्लव एरन का शव मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। सबने मान लिया कि पल्लव एरन अब जिंदा नहीं है। पुलिस ने अब पल्लव एरन को हरिद्वार से दबोच लिया है। जिला मुख्यालय पर क्राइम ब्रांच पर पल्लव एरन के परिजनों को बुलाया और परिजनों से उसकी पहचान कराकर आपस में बातचीत कराई। एसपी डा.धर्मवीर सिंह के मुताबिक पल्लव एरन जिंदा मिल गया है। उन्होंने बताया कि बाप बेटे के बीच गहरे मतभेद थे। दोनों एक दूसरे की जान के प्यासे थे। इसके चलते एक दूसरे की सुपारी देने की भी सामने आ रही है। उन्होंने पुलिस ने पल्लव एरन को बरामद किया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।
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बड़ा सवाल, दिल्ली में मिला शव किसका था
जिस शव को पल्लव का बताकर परिजनों ने अंतिम संस्कार किया था, वह किसका था, किस आधार पर उसकी पहचान पल्लव के रूप में की गई थी। इसमें भी कहीं कोई साजिश तो नहीं थी, पुलिस अब इन सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश कर रही है।
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