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इंटरनेशनल चाइल्ड ग्रोथ अवेयरनेस डे पर विशेष

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बच्चों को बर्गर, चाऊमीन, कोल्डड्रिंक से रखें दूर
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बिजनौर। बच्चों को प्यार दें, उन्हें अच्छा आहार देकर इसके प्रति उनकी इस आदत को साकार करें। बच्चों की सेहत से कोई समझौता न करें और उम्र के हिसाब से उनके कद पर भी विशेष ध्यान दें। चिकित्सकों के अनुसार बच्चों को समोसा, चाऊमीन, बर्गर, पेस्टी, पैटीज आदि फास्ट फूड से बच्चों को दूर रखें। ये सभी चीजें शरीर में किसी भी प्रकार से फायदा नहीं पहुंचाती बल्कि इनकी अधिकता कई बीमारियों को दावत भी देती है।
आज इंटरनेशनल चाइल्ड ग्रोथ अवेयरनेस डे है। बच्चों की ग्रोथ के लिए शुरुआत से ध्यान रखना चाहिए, जिससे कि वह बच्चे स्वस्थ और निरोग रहे। छह महीने तक मां के दूध के अलावा और कुछ नहीं देना होता है। इसके बाद मां के दूध के साथ साथ दलिया, फल, खिचड़ी, दाल आदि खिलाएं। एक साल का बच्चा वही खाने लगता है, जो हम खाते हैं। जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. विभू शर्मा के अनुसार औसतन एक साल तक के बच्चे का वजन आठ से दस किग्रा होता है। शुरू के छह महीने विटामिन डी नियमित रूप से देना चाहिए, जिससे बच्चे की हड्डियां मजबूत रहें। हर छह माह पर लंबाई और वजन की जांच होनी चाहिए। साथ ही कीड़ों की दवाई खिलानी चाहिए। चार साल के बच्चे की लंबाई 100 सेंटीमीटर होती है, इसकी जांच के लिए माप तौल कराएं।
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उन्होंने बताया कि जो शुरुआती पांच साल होते हैं, वे ज्यादा ध्यान देने के होते हैं। बच्चों का टीकाकरण नियमित होना चाहिए। सरकारी टीकों को लगवाना चाहिए। साफ सफाई रखनी चाहिए, जिससे गंदगी से उसे बीमारी न हो। अब बात आती है मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की तो घर से बाहर खेलने पर अधिक ध्यान दें, अन्यथा बच्चा चिड़चिड़ापन होने लगता है। घर का माहौल ठीक होना चाहिए। खुशहाल माहौल न होने से भी बच्चे सेहत पर असर पड़ता है। इस बात का सभी माता-पिता विशेष ध्यान रखें।
नगर के प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डा. नवनीत गर्ग ने बताया कि बच्चों को संतुलित आहार देना चाहिए। आहार में 60 से 75 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 20 से 25 प्रतिशत प्रोटीन और लगभग 15 प्रतिशत फैट होनी चाहिए। इसके अलावा विटामिन और मिनरल्स से भरपूर डाइट भी होनी चाहिए। बच्चों को ताजे फल और हरी सब्जियां अधिक देनी चाहिए। अधिक से अधिक ताजा पानी पिलाना चाहिए। उन्होंने बताया कि बच्चों को कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड भोजन, बर्गर, पिज्जा, पेस्टी, पैटीज, समोसा आदि खाद्य और पेय पदार्थों से दर रखें। इनमें से कोई भी चीज शरीर के लिए स्वास्थ्यवर्धक नहीं है। नियमित रूप से बच्चों को आउटडोर गेम के लिए प्रेरित करें। उनका स्क्रीनिंग टाइम यानी मोबाइल, लैपटॉप, टीवी आदि का टाइम कम करें। शरीरिक खेलों पर अधिक ध्यान दें। स्वस्थ रखने के लिए बच्चों को कम से कम छह से आठ घंटे की नींद लगातार होनी चाहिए।
छह माह के बाद दूध पिलाने की प्रवृत्ति को कम करें और आयरन युक्त पदार्थों का भी सेवन कराएं। ऐसा न करने वाले बच्चों में आयरन की कमी होने जाती है और उनमें एनीमिया की समस्या हो जाती है। दूध में आयरन की मात्रा काफी कम होती है।
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औसतन एक साल के बच्चे की जन्म के समय पर लंबाई 50 सेंटीमीटर, एक साल का होने पर इसमें वृद्धि होकर 75 हो जाती है। दो साल के बच्चे की लंबाई 88 सेंटीमीटर हो जाती है। तीन साल पर 92 और चार साल के बच्चे की लंबाई 100 सेंटीमीटर होती है। अधिकांश की बच्चों की लंबाई उनके माता-पिता की लंबाई पर ही निर्भर करती है।बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए किताबी पढ़ाई के अलावा माता-पिता बच्चों को खेल खेल में ही सामाजिक और व्यवहारिक ज्ञान देकर उन्हें संस्कारित बनाएं।
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