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गेहूं की बंपर पैदावार पर करनाल बंट ने बिगाड़ा गणित

Sat, 04 May 2019 12:15 AM IST
Deepak Sharma अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
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रामपुर में बारिश और हवा से बेकार हुई गेहूं की फसल। अमर उजाला
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बिजनौर में  जिले में इस बार गेहूं की बंपर पैदावार हुई, जिसे लेकर किसानों में खासा उत्साह था,   लेकिन करनाल बंट बीमारी ने किसानों का खेल बिगाड़ दिया। खेतों में हो रही कुल पैदावार में दो प्रतिशत तक गेहूं के दाने इस बीमारी से प्रभावित होकर काले पड़ गए हैं। इस गेहूं को एफसीआई ने खरीदने से इंकार कर दिया है। हाल ही में क्रय केंद्रों पर खरीदा गया 150 कट्टे करनाल बंट बीमारी से प्रभावित    गेहूं एफसीआई के गोदाम से वापस कर दिया गया है।  
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कृषि विभाग के प्रयासों से इस साल साल 1.60 लाख हेक्टेयर जमीन में गेहूं की फसल बोई गई थी। अधिकारियों की मौजूदगी में क्राप कटिंग कराई गई तो फसल की औसत पैदावार 32 से 42 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पाई गई। जबकि पिछले सालों में गेहूं की पैदावार 34.69 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही थी।
 बंपर पैदावार से कृषि विभाग के अधिकारी और किसान दोनों  उत्साहित हुए। किसान जब इस गेहूं को सरकारी क्रय केंद्रों पर बेचने के लिए गए तो वहां इस बारिश से प्रभावित बताकर खरीदने से इंकार कर दिया गया। डिप्टी आरएमओ घनश्याम वर्मा के अनुसार बारिश से पकी खड़ी गेहूं की फसल में करनाल बंट रोग हो गया है। इस बीमारी से गेहूं का दाना काला पड़ जाता है, जो छन्ना मारने पर भी नहीं निकलता है। मानक के अनुसार दो प्रतिशत तक रोग प्रभावित फसल होने पर गेहूं नहीं खरीदा जा सकता है। केंद्र की टीम बीमारी प्रभावित फसल का अध्ययन करने मुरादाबाद आई थी। टीम को नमूना सौंप दिया गया है। सरकारी खरीद केंद्रों पर खरीदा गया 370 कट्टे गेहूं बृहस्पतिवार को एफसीआई के गोदाम भेजा गया था, इसमें से 150 कट्टे रोग ग्रस्त गेहूं बताकर लौटा दिए गए हैं।
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किसानों में रोष, आंदोलन की चेतावनी
बिजनौर में इस संबंध में भाकियू पदाधिकारी उप क्षेत्रीय विपणन अधिकारी से मिले। किसानों ने बताया कि पिछले दिनों हुई बारिश से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल प्रभावित हुई है। भाकियू के जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह, अतुल कुमार आदि किसानों ने कहा कि पिछले सालों में भी ऐसा गेहूं खरीदा गया था।   बंपर पैदावार हुई है, किसान इस गेहूं को लेकर कहां जाएं। यदि सरकारी   केंद्रों पर गेहूं नहीं खरीदा गया किसानों को खुले बाजार में सस्ते दामों पर गेहूं बेचना पडे़गा। समस्या का समाधान न होने पर उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं, डिप्टी आरएमओ ने भरोसा दिलाया है कि केंद्र से एक दो दिन में इस गेहूं की खरीद के आदेश आने की उम्मीद है।

क्या है गेहंू की करनाल बंट बीमारी
बिजनौर में करनाल बंट मिट्टी या बीज में पैदा होने वाले कवक टिलेशिया इंडिका के कारण होता है। यह कवक मिट्टी में चार पांच साल तक जीवित रह सकता है। इस कवक के प्रभाव पर मौसम का असर पड़ता है। अनाज के उन्नत होने के समय 18 से 24 डिग्री सेल्सियस तापमान इस रोग के लिए अनुकूल माना जाता है। इस रोग में गेहूं का दाना फूलता नहीं है, दाने का आधार काला पड़ जाता है। कच्चे दाने को कुचलने पर सड़ी हुई मछली जैसी बदबू आती है। दाने के पक जाने पर उसके अंदर की सामग्री भी काले पाउडर के रूप बाहर निकलती है।

पुराने बीज का गेहूं भी     हो जाता है काला :   अवधेश मिश्र
बिजनौर में  जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्र ने बताया कि जिले में करनाल बंट का असर नहीं है। अगर किसान लगातार एक ही बीज को बोते हैं तो इससे दाना कुछ काला पड़ जाता है। ऐसे मामले भी कम ही देखने को आते हैं। किसानों को पुराने बीज को बदलकर नया बीज बोना चाहिए। विभाग की टीम को भेजकर गेहूं के दानों की जांच कराई जाएगी। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

खरीद का लक्ष्य पूरा होना आसान नहीं
बिजनौर में डिप्टी आरएमओ घनश्याम वर्मा के अनुसार जिले का गेहूं खरीद   का लक्ष्य 43500 मैट्रिक टन है। जिले में विभिन्न जगह संचालित 70     केंद्र पर गेहूं खरीदा जा रहा है। अब तक 3912 मैट्रिक टन खरीदा जा   चुका है। उनका कहना है कि इस साल गेहूं की पैदावार पिछले साल के मुकाबले अधिक है। जिले में किसान गन्ना अधिक बोते हैं। गेहूं कम      रकबे में बोया जाता है। इसलिए गेहूं का लक्ष्य पूरा होना कठिन है। केंद्रों     पर गेहूं की खरीद 15 जून तक होगी।
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