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बिजनौर: नजीबाबाद - मोटा महादेव मंदिर पर सर्वप्रथम जल चढ़ाते हैं कावड़िये

Wed, 15 Feb 2023 11:39 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
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नजीबाबाद का मोटा महादेव स्वयंभू सिद्धपीठ मंदिर।
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- मौर्य काल के वक्त से है मोटा महादेव मंदिर, 1780 में मंदिर का हुआ था जीर्णोद्धार
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फोटो-15एनजेडबी05आर
नजीबाबाद। यूं तो स्वयंभू मोटामहादेव मंदिर मौर्य काल के वक्त से बताया जाता है, लेकिन 1780 में साहनपुर रियासत के राजाओं ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। मान्यता है कि मोटा महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने वालों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महाशिवरात्रि पर हरिद्वार से गंगाजल और कांवड़ लेकर आने वाले लाखों शिवभक्त यहां जल चढ़ाने के बाद ही अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते हैं।
मोटा महादेव मंदिर के महंत शशिनाथ बताते हैं कि सदियों पहले उक्त स्थान पर शिवलिंग धरती से प्रकट हुआ था। साहनपुर रियासत के राजा चतर सिंह ने मंदिर को विस्तृत रूप देने का कार्य किया था। महंत शशिनाथ बताते है कि मंदिर परिसर में भैरव बाबा का मंदिर भी है, शिव का जलाभिषेक करने के उपरांत शिवभक्त भैरव बाबा मंदिर में पुजारी शशिनाथ से सोटा लगवाते है, जिससे शिवभक्तों के दुख-दर्द और सफर की थकान दूर हो जाती है। हरिद्वार से गंगाजल और कांवड़ लेकर आने के बाद शिवभक्तों के लिए पहला पड़ाव मोटा महादेव मंदिर ही पड़ता है। महाशिवरात्रि पर दूर-दराज से आने वाले शिवभक्त यहां जल चढ़ाने के बाद ही अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते हैं।
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खाली हो जाती है गंगाजल की शीशी
हरिद्वार से कांवड़ उठाते वक्त शिवभक्त मोटामहादेव मंदिर में भगवान शिव के जलाभिषेक के अलग से एक शीशी में गंगाजल लाते हैं। मोटा महादेव मंदिर पहुंचने पर कांवड़िये उसी शीशी के गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि यदि कोई शिवभक्त मंदिर में जल चढ़ाए बिना आगे बढ़ जाता है तो उस शीशी का गंगाजल अपने आप ही सूख जाता है।
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