- 15 ट्रैक्टर ले जाकर प्रशासन ने कब्जा मुक्त कराने को छेड़ा अभियान
- मुजफ्फरनगर और बिजनौर दोनों जिलों की टीमों ने की कार्रवाई
- हैदरपुर वेटलैंड क्षेत्र में पक्षियों को हो रहा था इससे नुकसान
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। एक ओर जहां लगातार प्रकृति संरक्षण और गंगा खादर में प्राकृतिक खेती को बढ़ाया दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर हस्तिनापुर अभयारण्य क्षेत्र के गंगा खादर में एक या दो नहीं, बल्कि तीन हजार बीघा जमीन पर अवैध रूप से गेहूं की बुवाई कर दी गई। कमाल यह है कि सिंचाई विभाग और वन विभाग की यह जमीन है, लेकिन दोनों ही विभाग इससे अनजान बने हुए थे। किसी ने भारत सरकार को हैदरपुर वेटलैंड क्षेत्र में पक्षियों को नुकसान होने की शिकायत की तो मुजफ्फरनगर और बिजनौर की प्रशासनिक टीम ने खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलवा दिए। जमीन इतनी है कि अभी कब्जामुक्त होने में करीब चार दिन और लगेंगे।
अभी कुछ समय पहले ही गंगा खादर में प्रशासन ने करीब दो हजार बीघा जमीन से कब्जा हटवाने का दावा किया था। वहां कई दिन तक ट्रैक्टर चले। अब नया मामला गंगा खादर में मुजफ्फरनगर के गांव रणजीतपुर का आया। यहां पर गंगा खादर में करीब तीन हजार बीघा जमीन पर गेहूं की फसल लहलहा गई। कमाल यह है कि प्रशासन यह जमीन वन विभाग और सिंचाई होने का दावा कर रहा है, तो वहीं दोनों विभाग इससे पूरी तरह अनजान बने हुए हैं। बुधवार मुजफ्फरनगर एसडीएम और डीएफओ, बिजनौर से एसडीएम सदर मोहित कुमार करीब 15 ट्रैक्टर लेकर जमीन से कब्जा हटवाने पहुंचे। वहां कई सौ बीघा जमीन पर खड़े गेहूं की जुताई करा दी गई। एसडीएम सदर मोहित कुमार ने बताया कि अभी करीब तीन से चार दिन तक यह अभियान चलेगा। तब पूरी तरह यह जमीन कब्जा मुक्त हो पाएंगी।
कौन कर रहा था खेती करने वालों से वसूली
खादर में फसल बुवाई का खेल कोई नया नहीं है। वहां पर जमीन चाहे जिस विभाग की हो, लेकिन यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि बिना वसूली वहां फसल बुवाई नहीं होती। सूत्रों की माने तो सिंचाई विभाग और वन विभाग के ही कुछ लोग वसूली कर लेते हैं। उधर प्रशासन ने इसकी जांच भी शुरू कर दी है।
किसकी कितनी जमीन
जिस जमीन से बुधवार को कब्जा हटवाया गया, उसमें वहां सिंचाई विभाग करीब 147 हेक्टेयर और वन विभाग की 127 हेक्टेयर जमीन है। दोनों ही विभाग की इस जमीन पर जहां कुछ गंगा की धारा है तो कुछ खाली पड़ी है। बाकी जमीन पर गेहूं की फसल बो दी गई थी, अब गेहूं की फसल पकने के लिए तैयार थी, लेकिन दिल्ली हुई शिकायत से पूरा खेल खुल गया।
अभी हजारों बीघा जमीन पर है कब्जा
अभी जो कब्जा हटाया गया है, गंगा खादर पर नजर डालें तो वह बहुत कम हैं। बैराज पुल से आगे और पीछे दोनों ओर ही हजारों बीघा जमीन पर फसल और पलेज हो रही है। सूत्रों की माने तो पलेज बोने के लिए भी मोटी वसूली की जाती है। गंगा की धारा होने के कारण कोई वहां नहीं पहुंच पाता, बस विभागीय अधिकारी भी इसी का लाभ उठाते हुए फसल बोने की अनुमति दे देते हैं।