फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शायरों ने कलाम पेश कर लूट ली महफिल

Thu, 03 Sep 2015 11:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
विज्ञापन
विज्ञापन
बिजनौर। जिला कृषि, औद्योगिक व सांस्कृतिक प्रदर्शनी के अंतर्गत बुधवार रात आयोजित आलमी मुशायरे में शायरों ने अपने कलाम पेश कर महफिल लूट ली। मुशायरे में तड़के तक श्रोता शायरों को सुनने के लिए जमे रहे।
विज्ञापन



इंदिरा बाल भवन में आयोजित मुशायरे का शुभारंभ नईमुल हसन, सदर विधायक रुचि वीरा, नगीना विधायक मनोज पारस व सदर चेयरमैन फरीद अहमद ने संयुक्त रूप से शमा रोशन कर किया। शफक बिजनौरी ने नात व शकलैन ज्वालापुरी ने हम्द सुनाकर मुशायरे का आगाज किया।

फैसल स्योहारवी ने फरमाया कि नुकसान देगी आपसी जिद खानदान को ये खाक में मिला देगी तेरी आन बान शान को। अबुजर नवेद ने दिल का हाल सुनाया कि वो पास था तो उससे ना कह पाया दिल की बात-अब वो चला गया है तो बेहद मलाल है।
विज्ञापन


रफी बढ़ापुरी ने सुनाया कि निगाहें चुराकर निकल जाऊंगा मैं ये क्यों सोचते हो बदल जाऊंगा मैं। शफक बिजनौरी ने आगाह किया कि दाग रुसवाई का आ जाता है जब दामन पर-सदियां लग जाती हैं फिर उस दाग को धोने में। किशोर शायर सूफियान असगरी को बहुत पसंद किया गया।

उसने सुनाया कि मां-बाप से जो बेटा हर वक्त खफा होगा, नाराज नबी होंगे नाराज खुदा होगा, मजलूम यतीमों को जो लोग सताएंगे, कांपेगी जमीं फिर से पैदा जलजला होगा। उसने केंद्र सरकार पर चुटकी लेते हुए कहा कि वादों के वो अंबार लगाने में रह गए, नफरतों की आग दिल में जलाने में रह गए/दिल्ली का दिल तो लूट गया आम आदमी, ओबामा को मोदी चाय पिलाते रह गए।

डा.नदीम ने फरमाया कि अमीरें शहर का नशा उतरने वाला है, हमारे जिस्म का हरेक जख्म भरने वाला है, तू रो रहा है दस्तार छिन गई तेरी, तू मुझको देख मेरा सर उतरने वाला है। डा.महताब आलम ने फरमाया कि जिनकी पलकों पर तेरे ख्वाब हुआ करते हैं, जिंदगी में वही बेताब हुआ करते हैं, दिल भी तोड़ा तो सलीके से ना तोड़ा तुमने, बेवफाई से भी आदाब हुआ करते हैं।

हास्य के शायर सज्जाद झंझट ने सभी को अपनी शायरी से गुदगुदाया। उन्होंने फरमाया कि दिल दिया है मैंने तुझकों मौका देखकर, आ भी जा अब करले प्यार मौका देखकर। एएम तुराज ने फरमाया कि वो मुझसे दूर न होते मैं उनसे दूर न होता, ये अनहोनी न होती तो होने को क्या होता। हनीफ तरील ने फरमाया कि हमारे दौर में चीख और पुकार देखी हैं, सियासी जमीन में दहशत की मार देखी है।

पाकिस्तानी शायरा व फिल्मी अभिनेत्री सलमा आगा का मंच पर आने पर जोरदार तालियों से स्वागत किया गया। उन्होंने उर्दू को जबान की ताकत बताया। कहा कि जब तक मुशायरे जिंदा हैं, उर्दू जिंदा रहेगी। उन्होंने फरमाया कि रंग जीवन में भरके देख लो, हमसे दोस्ती करके देख लो। उन्होंने अपना प्रसिद्ध गीत दिल के अरमां आसुंओं में बह गए गीत गाकर खूब तालियां बटोरीं।

हसन काजमी ने फरमाया कि शमा चौखट पर जलती रही, कतरा-कतरा पिघलती रही, चांद आंगन में उतरा नहीं, मुंतजिर रात ढलती रही। मिसम गोपालपुरी ने फरमाया कि मुल्क का अपने वफादार नहीं हो सकता है, जान लुटाने को जो तैयार नहीं हो सकता है, दिल में जिसके भी है इमान की शमां रोशन, मेरा दावा है वो गद्दार नहीं हो सकता है।

 उन्होंने फरमाया कि गुलशनें हिंद को सींचा है लहू से हमने, बीज नफरत के किसी को बोने नहीं देंगे, जिस्म के कितने ही हो जाएं हमारे टुकड़े, हम कभी मुल्क के टुकड़े होने नहीं देंगे। नईम अख्तर ने फरमाया कि उसका सैल कौन से खाने में आएगा, जब जख्म देने वाला ही मरहम लगाएगा। उन्होंने फरमाया कि जो कहते हैं अब बस्ती जलने नहीं देंगे, ये ही बर्बादियों पर हाथ मलने नहीं देंगे/मैं किनारे होता चला गया तो देखना एक दिन, सड़क के लोग ही मेरी चलने नहीं देंगे। कार्यक्रम की निजामत कर रहे जावेद दानिश के शेरों को बहुत पसंद किया गया।

उन्होंने फरमाया कि सुर्ख डोरे नहीं ये खूने जिगर है शायद, मेरी आंखों में कई रूत का सफर है शायद। इकबाल अशर ने फरमाया कि ये जुगनूओं की कयादत में चलने वाले लोग, चराग की माश्निंद जलने वाले लोग। शायरा अंजुम रहबर की शायरी को खूब पसंद किया गया। उन्होंने गीत एक सांवली सी लड़की एक बावली सी लड़की सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।

उन्होंने फरमाया कि होठों की भी क्या मजबूरी रहती है, सब कुछ कहकर बात अधूरी रहती है, उनसे मिलकर अंजुम ये अहसास हुआ, कुरबत में भी कितनी दूरी रहती है। उन्होंने फरमाया कि हमसे फिर प्यार का इजहार किया है तुमने, ये तमाशा तो कई बार किया है तुमने, अब तो मैं अंजुम बगावत पर उतर आई हूं, शाखे गुल थीं मुझे तलवार किया है तुमने।

 उनके कुछ शेर पढ़कर बैठने के बाद श्रोताओं की मांग पर वे फिर उठीं व शेर सुनाए। प्रोफेसर वसीम बरेलवी ने फरमाया कि बातों बातों में जहां बात बिगड़ जाती है, फिर बनाओ भी तो बात कहां आती है। उन्होंने फरमाया कि हूं तो सन्नाटा मगर मेरी सोहबत में चंद रोज, रह लिए तो देखना अंजुमन हो जाओगे।

उन्होंने फरमाया कि हम भी दिल की बात कहां कह पाते हैं, आपसे कुछ कहते कहते रुक जाते हैं, खुशबू अपने रास्ते खुद तय करती है, फूल तो डाली के होकर रह जाते हैं। तड़के साढ़े चार बजे तक मुशायरा चला। कार्यक्रम अध्यक्ष सभासद आकिफ अंसारी व जाकिर हुसैन राणा तथा संयोजक मोहम्मद आदिल व मोहम्मद अरशद रहे।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें