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कालागढ़ में कॉलोनियों की बेदखली पर रोक

Fri, 17 Feb 2017 10:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
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कालागढ में ध्वस्तीकरण को इन मकानों पर लग गया था लाल निशान। - फोटो : अमर उजाला
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कालागढ़ में रामगंगा बांध परियोजना की कॉलोनियों में निवास कर रही जनता को एनजीटी के आदेश का सहारा लेकर बेदखल करने की कार्रवाई पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ब्रेक लगा दिया है। इससे नागरिकों ने राहत की सांस ली है। वहीं प्रशासन की तमाम तैयारियां धरी की धरी रह गई हैं। 
कालागढ़ की रामगंगा बांध परियोजना की कॉलोनियो से 566 नागरिकों को बेदखल करने की तैयारी चल रही थी। उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ स्टैंडिंग काउंसिल परेश त्रिपाठी ने सचिव वन एवं पर्यावरण, जिलाधिकारी पौड़ी, उपजिला अधिकारी  कोटद्वार व कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक रामनगर को भेजे आदेश में कहा है कि याचिका संख्या 323 एमएस आफ 2017 अनीता बाली एंड अदर्स वर्सेस स्टेट एंड अदर्स में कहा गया है कि बिना पुनर्वास के लाभ दिए नागरिकों को यहां से न हटाया जाए। 23 फरवरी को इसके लिए काउंटर दाखिल किया जाए। 27 फरवरी को इसकी सुनवाई होगी। इस दौरान यहां से ध्वस्तीकरण/बेदखली न की जाए। 
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हाईकोर्ट के इस आदेश पर नगर की भाजपा कार्यकारिणी ने हर्ष जताया है। मंडल अध्यक्ष राजकुमार, राजेश्वर अग्रवाल, शंकर सिंघल, वीएन सिंह यादव आदि ने इसे जनता के हक की जीत करार दिया है। उधर, कांग्रेस  नेता शैलेंद्र सिंह रावत, कैबीनेट मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, नगर अध्यक्ष आकाशदीप शर्मा, नदीम अहमद खान आदि ने भी इस पर खुशी व्यक्त की है।
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क्या है मामला
कालागढ़  की रामगंगा बांध परियोजना की कॉलोनियो से 566 नागरिकों को बेदखल करने के आदेश एनजीटी ने 27 जनवरी को जारी किए थे। इस पर प्रशासन ने 20 फरवरी को कालागढ़ में बेदखली की कार्रवाई करने के लिए आवासों को चिन्हित करना शुरू कर दिया था। इसके लिए बड़ी संख्या मे पुलिस बल को 18 व 19 फरवरी को कालागढ़ पहुंचने के आदेश जारी किए गए थे। उप जिलाधिकारी राकेश तिवारी का कहना है कि इसके लिए तैयारियां की गई हैं। हाईकोर्ट का आदेश आने पर उनका पालन किया जाएगा। साथ ही कहा कि नगर में रह रहे 398 नागरिकों को पुनर्वास की सूची में शामिल किया गया है। उनका सत्यापन किया जा रहा है।
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