ऑनलाइन ट्रेडिंग के काले कारोबार में लगभग ढाई लाख लोगों से 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी करने वाली वेबवर्क कंपनी से अब बॉलीवुड कनेक्शन भी सामने आ रहे हैं। जांच में जुटी एजेंसियों को प्रमाण मिले हैं कि सोशल ट्रेडिंग से जुड़ी कंपनियों को बॉलीवुड से जुड़े कुछ अभिनेताओं के परिजनों और रिश्तेदारों ने भी मोटा पैसा लगाया है। इसमें पता चला है कि गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ और मुजफ्फरनगर में रह रहे अभिनेताओं के परिजनों ने करीब 80 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम नोटबंदी के बाद चंद दिनों में ही इन कंपनियों में लगाई है। जांच एजेंसियां ऐसे तमाम लोगों के बैंक खातों को खंगाल रही हैं। मेरठ के बुढ़ाना गेट क्षेत्र निवासी एक ऐसे ही व्यक्ति के खाते से करीब 12 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम लगाने के साक्ष्य भी मिल गए हैं।
जांच एजेंसियां सोशल ट्रेडिंग के महाठगी के काले कारोबार के पीछे बॉलीवुड अभिनेताओं को भी पार्टनर मानकर चल रही हैं। साथ ही आशंका जताई है कि इन अभिनेताओं ने अपना पैसा लगाने के लिए परिजनों और रिश्तेदारों का इस्तेमाल किया है। गाजियाबाद निवासी अमित किशोर जैन भी अपनी शिकायत में तमाम साक्ष्य विशेष जांच दल (एसआईटी) और यूपी एसटीएफ को दे चुके हैं। इन तथ्यों की पड़ताल के दौरान एजेंसियों को पता चला है कि नोटबंदी के दौरान अपने पैसे को नंबर एक करने का खेल जमकर चला। बैंकों से साठगांठ कर कंपनियों और बॉलीवुड से जुड़ी हस्तियों ने अपना पैसा भी ऑनलाइन किराना कारोबार और सोशल ट्रेडिंग से जुड़े लाइक बिजनेस में भी लगाया है।
ग्राहकों की आईडी का इस्तेमाल
कंपनियों से लाइक के लिए पैक खरीदने वाले ग्राहकों की आईडी का भी इस्तेमाल हुआ। इसके जरिये अतिरिक्त पैक की खरीदी दिखाई गई। जबकि पैसा ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से नहीं, बल्कि कैश में बैंक में जमा किया गया। अब एजेंसियां इस बात की जांच में लगी हैं कि कितना पैसा बैंकों में नोटबंदी के दौरान जमा हुआ। कितनी आईडी लगाकर नोट बदले गए। आशंका यह भी है कि दूसरे की आईडी लगाकर नोट बदले गए हों। जांच एजेंसियों को आशंका है कि बैंकों ने इस कारोबार को व्यापक तौर पर सहयोग दिया, जिससे हर स्तर पर हेराफेरी हुई। ऐसे में बार-बार बैंकों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
मुजफ्फरनगर से लगी बड़ी रकम
जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि मुजफ्फरनगर के एक शख्स ने 50 करोड़ से अधिक की रकम ऑनलाइन ठगी के कारोबार में लगाई, जिसका कनेक्शन बॉलीवुड से जुड़े लोगों से है। उसने 10 से 25 नवंबर के बीच करीब 35 करोड़ रुपये से अधिक की रकम लगाई। इस दौरान मुजफ्फरनगर से बड़ी संख्या में आईडी भी लगाई गई हैं। डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज (डीजीसीईआई) से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मुजफ्फरनगर से 10 नवंबर के बाद करीब 15 दिन के अंदर अचानक से सोशल ट्रेडिंग के बिजनेस में आईडी लगाई गई है। इसमें 30 आईडी के जरिये बड़ी रकम लगाई गई है। ऐसे में एजेंसियों के रडार पर बॉलीवुड स्टार्स से जुड़े परिजन और रिश्तेदार भी हैं।
प्रचार में दिखे थे किंग खान, नवाजुद्दीन
वेबवर्क कंपनी के वेब पोर्टल एड्सबुक डॉट कॉम के प्रचार में अभिनेता शाहरुख खान और नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी नजर आ चुके हैं। दरअसल, ये दोनों अपनी फिल्म रईस के प्रमोशन के दौरान एड्सबुक के प्रचार से जुड़े थे। हालांकि, इस गोरखधंधे के खुलासे से पहले तक नवाजुद्दीन इसके विज्ञापनों में लगातार चैनलों और अखबारों में नजर आते रहे। दोनों अभिनेता वेबवर्क की कई पार्टियों में भी शामिल हुए थे।
12 हजार से ज्यादा आईडी लगीं
वेबवर्क में मेरठ और मुजफ्फरनगर जिले से 12 हजार से अधिक आईडी लगी हैं। इनमें से 2700 आईडी मुजफ्फरनगर से लगाई गई हैं, जिसमें 80 से 90 फीसदी 57500 (प्रत्येक) रुपये की हैं।
इवेंट कंपनी का संचालक निशाने पर
मेरठ के एक इवेंट कंपनी के संचालक ने वेबवर्क से करीब 1.20 करोड़ रुपये कमाये हैं। नवंबर-2016 में उसके खातों में इस धनराशि का ट्रांजैक्शन हुआ है। जांच एजेंसियां उसे भी नोटिस जारी कर तलब करने की तैयारी में हैं।
फिल्मी सितारों से हो सकती है पूछताछ
नोएडा। कानून के मुताबिक सितारों को कोई भी विज्ञापन करने से पहले संबंधित कंपनी या उत्पाद के बारे में अच्छे से जानकारी लेना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। ये कानून इसलिए बनाया गया है, क्योंकि लोग सितारे आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं। ऐसे में उनके फंसने की आशंका काफी बढ़ जाती है। जैसा कि वेबवर्क ने नवाजुद्दीन और शाहरुख खान के जरिये किया। इन अभिनेताओं के जुड़ने के बाद ही कंपनी में निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी। इससे पहले एब्लेज कंपनी ने भी निवेशकों को फंसाने के लिए सन्नी लियोनी और अमीषा पटेल का सहारा लिया था। जांच एजेंसियां इन फिल्मी सितारों से भी फ्रॉड कंपनियों के बारे में पूछताछ कर सकती हैं।
लुक आउट नोटिस जारी करने की तैयारी
नोएडा। नोएडा पुलिस ने बृहस्पतिवार को वेबवर्क कंपनी के मालिक अनुराग गर्ग और संदेश के ठिकानों पर छापा मारा, लेकिन दोनों नहीं मिले। अब पुलिस इनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कराने की तैयारी में है। इसके लिए पुलिस शुक्रवार को विदेश मंत्रालय को पत्र लिखेगी। एएसपी गौरव ग्रोवर के अनुसार पुलिस टीम को दोनों फरार आरोपियों के पासपोर्ट नंबर मिल गए हैं। इसके आधार पर ही इनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी होगा। अनुराग गर्ग मूल रूप से गली नंबर सात, नेहरू नगर, मेरठ और संदेश वर्मा बरला गांव, मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। अनुराग फिलहाल क्रॉसिंग रिपब्लिक के लिबोनी अपार्टमेंट में पत्नी स्पर्श के साथ रहता है। दोनों भले ही एक साथ रह रहे हों, लेकिन बताया जा रहा है कि अनुराग के फर्जीवाड़े को लेकर दंपति में कुछ समय से विवाद चल रहा था। वहीं संदेश दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश में रहता है।
9 फरवरी से कर्मचारियों से नहीं मिले आरोपी
पुलिस ने वेबवर्क के कुछ कर्मचारियों से भी पूछताछ शुरू कर दी है। इनसे कंपनी के फर्जीवाड़े, उसके व्यवसाय और मालिकों व अधिकारियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। बृहस्पतिवार को पुलिस ने एक महिला कर्मचारी से पूछताछ की। उसने बताया कि नौ फरवरी से अनुराग और संदेश किसी कर्मचारी से नहीं मिले हैं और न ही उन लोगों की बात हुई है।
फिर यस बैंक की भूमिका पर सवाल
पुलिस के अनुसार वेबवर्क के यस बैंक के खाते में अभी जीरो बैलेंस हैं। कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने वाले गाजियाबाद के अमित किशोर जैन ने बताया कि कंपनी के यस बैंक के खाते में काफी रकम जमा थी। उन्होंने खुद बैंक को पत्र लिखकर कंपनी की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी दी थी। साथ ही अनुरोध किया था कि वह कंपनी के खाते की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करे। अमित जैन के अनुसार अगर बैंक ने कोई कार्रवाई नहीं की तो वह उसके खिलाफ भी शिकायत करेंगे। इससे पहले एब्लेज केस में एसटीएफ ने राजनगर, गाजियाबाद स्थित यस बैंक के बिजनेस रिलेशनशिप मैनेजर अतुल मिश्रा को गिरफ्तार किया था।