दूसरे प्रदेशों में जाती हैं कफील के हाथ से बनी नाव
नींदडू़। पिछले 20 वर्षों से नाव बनाने का कार्य कर रहे नींदडू़ खास निवासी कफील अहमद (58) के हाथों से तैयार की जाने वाली नाव देहली, चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व गुजरात के अलावा प्रदेश के गाजियाबाद और मुजफ्फर नगर आदि में सप्लाई की जाती हैं।
कफील अहमद ने बताया कि उन्होंने इमारती फर्नीचर बनाने वाले प्रसिद्ध कारीगर छोटे मिस्त्री के सानिध्य में रहकर नाव बनाना सीखा तथा राजस्थान के जूनागढ़, काला सिंह तथा गुजरात के राजकोट में नाव बनाईं। कफील का कहना है कि गुजरात में बबूल की लकड़ी से नाव बनाई जाती है, लेकिन यहां जामुन की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है। तख्तियों को रिपिट से जोड़ा जाता है। नाव के अंदर पानी आने से रोकने के लिए केमिकल और लीक सील कंपाउंड से दरजों को बंद किया जाता है। नाव को मजबूती देने के लिए उसे बाहर से जस्ती चादर से ढका जाता है। हालांकि क्षेत्र में नाव की अधिक मांग नहीं होने के बावजूद वह हर वर्ष में 20-25 नाव तैयार करते हैं, जिन्हें दूसरे नगरों या सूबों में बेचा जाता है।
कई आकार की नाव बनाते हैं
कफील का कहना है कि नाव कई आकार की होती हैं। वह 24 फुट लंबी और आठ फुट चौड़ी समेत कई साइज की नाव बनाते हैं, लेकिन मांग और खपत के आधार पर उन्होंने 13 फुट लंबी और पांच फुट चौड़ी नाव ज्यादा बनाई हैं। 13 फुट लंबी नाव में आठ-दस व्यक्ति सवार हो सकते हैं, जबकि 24 फुट लंबाई की नाव में 50 लोग बैठ सकते हैं। 13 फुट की नाव घर पर तैयार की जाती है, जबकि 24 फुट लंबाई की नाव बड़ी जगह में बनानी पड़ती है।
आपदा में निशुल्क नाव उपलब्ध कराते हैं
कफील अहमद बताते हैं कि 2010 में कालागढ़ डैम से पानी छोड़ने के बाद क्षेत्र में आई बाढ़ से निपटने के लिए उन्होंने अपने पास उपलब्ध सभी नाव नि:शुल्क सेवार्थ प्रशासन को देने की पेशकश की थी। तत्कालीन एसडीएम ने आवश्यकता होने पर नाव लेने की बात कही थी, किंतु इसकी जरूरत नहीं पड़ी। किसी बालक या व्यक्ति के पानी में डूबने की स्थिति में वह पुलिस या अन्य लोगों को तत्काल नि:शुल्क नाव उपलब्ध कराते हैं। प्राकृतिक आपदा में नि:शुल्क सेवा के लिए हर समय तैयार हैं।