फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जायरीनों की आंखें हुईं नम

Sun, 29 May 2016 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बिजनौर
विज्ञापन
जोगीरम्पुरी दरगाह क्षेत्र में अंजुमन द्वारा बनाए मंजर देखते जायरीन। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
बिजनौर के नजीबाबाद में मातमी जुलूस और मातमी मजलिसों से दरगाह की जियारत करने आए जायरीनों की आंखें चौथे दिन भी नम रहीं। कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों की दास्तां सुनकर जायरीनों ने सींनाजनी की। 
विज्ञापन


दरगाह-ए-आलिया नजफे हिंद जोगीरम्पुरी में जायरीनों ने रविवार को मौला अली की बारगाह में नजराना-ए-अकीदत पेश कर मन्नतें मांगी। बतौर तर्वरूख जायरीन दरगाह परिसर में स्थित चश्मे का पानी लेने के लिए बेताब रहे।

जायरीनों का अकीदा है कि चश्मे का पानी बीमारियों से निजात दिलाता है। उधर, शमशुल हसन हॉल में आखिरी दिन भी शिया विद्वानों ने मजलिसों का खिताब करते हुए नेकी, इंसानियत से जिंदगी जीने, करबला के शहीदों की कुर्बानियों से सबक लेने, दीन और इस्लाम की हिदायदों पर अमल करने की सलाह दी।
विज्ञापन


वाकयाते करबला का जिक्र करते हुए शिया विद्वानों ने क्रूर बादशाह यजीद के जुल्म की कहानी बयां की। उन्होंने कहा कि कर्बला की जंग के जरिये दीन और इस्लाम को बचाने के लिए जो कुर्बानियां दी गई वो कयामत तक याद रखी जाएगी। 
मातमी मजलिसों को मौलाना नजर अब्बास, मौलाना इरफान हैदर, मौलाना शौजफ, मौलाना रब्बुल हसन जलालपुरी, गजनफर अब्बास तूसी, मौलाना कलीम अब्बास ने खिताब किया। रविवार को भी देर शाम तक कई अंजुमनों ने मातमी जुलूस बरामद किए। रविवार की देर रात महफिले मसालमा से चार रोजा मातमी मजलिसें खत्म होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें