कोल्हुओं का देना होगा गुड़ और गन्न का हिसाब
बिजनौर। शासन की गुड़ कोल्हुओं पर शिकंजा कसने की तैयारी है। अभी तक कोल्हुओं के लिए खरीदे गए गन्ने तथा गुड़ उत्पादन आदि का अभिलेख रखने का कोई नियम नहीं है। परंतु अब कोल्हुओं को गन्ना व गुड़ का रोजाना हिसाब देना होगा।
जिले में गन्ना पेराई के लिए नौ चीनी मिल हैं। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में कोल्हू संचालित हैं। शासन से चीनी मिलों के मानक तय हैं। परंतु गुड़ बनाने वाले कोल्हू के लिए कोई नियम नहीं है। सहायक चीनी आयुक्त कार्यालय के अनुसार बिजनौर परिक्षेत्र में पेराई सत्र 2021-22 में संचालित कोल्हुओं की संख्या मात्र 178 है। जबकि धरातल पर कोल्हुओं की बड़ी संख्या है। कोल्हुओं के पास न तो खरीदे गए गन्ना का कोई रिकॉर्ड होता है और न ही तैयार गुड़ की मात्रा का अभिलेख होता है। कोल्हुओं के गन्ना पेराई शुरू करने तथा पेराई बंद करने के समय की कोई सूचना चीनी उद्योग विभाग के पास नहीं होती है। परंतु अब कोल्हुओं को नियमों का पालन करना होगा। सहायक चीनी आयुक्त कार्यालय के अनुसार शासन कोल्हुओं को लेकर सख्त हो गया है। पंचवर्षीय खांडसारी नीति के अंतर्गत खड़े पावर कोल्हू तथा पट्ट पावर कोल्हू के लिए नियम तय कर दिए गए हैं। सहायक चीनी आयुक्त डीपी मौर्य ने बताया कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण होंगे।
कोल्हुओं को इन नियमों का करना होगा पालन
सहायक चीनी आयुक्त डीपी मौर्य के अनुसार नवीन पंचवर्षीय खांडसारी नीति के अंतर्गत खड़े व पट्ट पावर कोल्हू स्वामियों को भी अब गन्ना खरीद रजिस्टर, गन्ना पेराई रजिस्टर, गुड़ उत्पादन रजिस्टर, रखना होगा। कोल्हू स्वामी को गन्ना पेराई व उत्पादन की सूचना सहायक चीनी आयुक्त को देनी होगी। अब तक कोल्हू स्वामी कोल्हू चलाने या बंद करने के समय की सूचना नहीं देते थे। परंतु नई नीति में कोल्हू चलाने व बंद करने की सूचना संबंधित खांडसारी निरीक्षकों तथा सहायक चीनी आयुक्त को देनी होगी।
जिले के गुड़ की गैर राज्यों समेत विदेशों में मांग
जिले में बने गुड़ की देश में ही नहीं विदेशों में भी पहचान है। जिले से गुड़ दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, बिहार आदि राज्यों में भेजा जाता है। अब तो जिले में जैविक गुड़ बड़े पैमाने पर बन रहा है। व्यापारी जैविक गुड़ को विदेश भी भेज रहे हैं। सहायक चीनी आयुक्त डीपी मौर्य के अनुसार हर साल गुड़ की मांग बढ़ रही है। गुड़ कोल्हू अक्तूबर में पेराई शुरू कर देते हैं। 178 कोल्हुओं ने 15 जनवरी तक साढ़े छह लाख क्विंटल गन्ना पेर कर 70 हजार क्विंटल गुड़ तैयार किया है।