कोरोना संकट से उबरने को मनुष्य के लिए हंसना-हंसाना जरूरी: गजेंद्र सिंह
बिजनौर, धामपुर। कोरोना ने चारों ओर दहशत का माहौल बना दिया है। अनेक लोग संक्रमित हो कर आइसोलेशन में हैं। इस महामारी से मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। हर चेहरा खौफजदा नजर आता है। गली और मोहल्लों में लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। उत्तर प्रदेश में तीन दिन और चार रातों का सप्ताहांत कोरोना कर्फ्यू से जीवन बोझिल होकर रह गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता बार एसोसिएशन धामपुर के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह एडवोकेट का कहना है कि कोरोना काल में वातावरण में चारों ओर तनाव है। जिसका सीधा दुष्प्रभाव मनुष्यों के शरीर पर पड़ रहा है। कोरोना संकट को कम करने के लिए थोड़ा सा हास्य उत्पन्न कर प्रयोग किया जाए तो इस संकटग्रस्त माहौल में कुछ राहत मिल सकती है। वह बताते हैं कि जनमानस में हंसने से बोझिल वातावरण से हल्कापन आता है। मानव के शरीर की विभिन्न कोशिकाएं राहत का भाव अनुभव करतीं हैं।
मई के पहले रविवार को मनाया जाता है विश्व हास्य दिवस
आम जनता में हंसी का वतावरण बनाने के लिए प्रत्येक वर्ष मई के पहले रविवार को विश्व हास्य दिवस मनाया जाता है। इसका प्रारंभ भारत में मुंबई में वर्ष 1998 में हुआ था। लोग नियमित तौर पर इन के क्लबों में जाते हैं। आपस में बैठ कर चुटकुले, क्षणिकाएं लघु कथायें सुनते हैं सुनाते हैं।
विभिन्न भाव भंगिमाओं के माध्यम से भी पैदा होता है हास्य
विभिन्न भावना भंगिमाओं के माध्यम से भी हास्य पैदा होता है, साहित्य में हास्य की कविताओं और हास्य कवियों की अलग प्रकार की पहचान है, अलग अलग अवसरों पर हास्य कवि सम्मेलन आयोजित कराए जाते हैं।
सोशल मीडिया पर उपलब्ध हास्य सामग्री से काफी राहत
आजकल कोरोना के संक्रमण के, समय में बड़ी संख्या में लोग एकांतवास में रहने को मजबूर है, इस तन्हाई के आलम मे सोशल मीडिया पर उपलब्ध हास्य संबंधी सामग्री काफी राहत पहुंचाती है।