बिजनौर जिले के करीब 50 गांवों में सरकारी जमीनों पर आवंटित पट्टों की आड़ में अवैध कब्जों का खेल चल रहा था। पट्टे निरस्त होने के बाद भी राजस्व और सिंचाई विभाग ने जमीन से कब्जे नहीं हटवाए और न ही चीनी मिलों ने गन्ने के बांड खत्म नहीं किए। 2009 से पट्टे खत्म होने के बाद भी अवैध कब्जे कर गन्ने की खेती की जा रही है। अब मामले का खुलासा होने के बाद राम गंगा कमांड, वन विभाग व राजस्व विभाग के हाथ पांव फूले हुए हैं। फिलहाल मामले की जांच राम गंगा कमांड विभाग के उपखंड चतुर्थ शेरकोट के एसडीओ को सौंपी गई है।
गन्ना विभाग की ओर से फर्जी सट्टों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। किसानों से उनके नाम अंकित खेती की जमीन की फर्द खतौनी मांगी जा रही है। अफजलगढ़ ब्लॉक के किसानों से भी खतौनी जमा करने को कहा गया। 48 से अधिक गांवों के किसानों ने फर्द खतौनी जमा नहीं की। जबकि करीब 4300 एकड़ जमीन पर ये किसान गन्ना पैदा कर रहे हैं। गन्ना विभाग ने जब 70 साल से चल रहे सट्टों को रद्द करने के लिए नोटिस दिए तो किसानों के होश उड़ गए। गन्ना विभाग ने अवैध कब्जों की जानकारी सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दी तो हड़कंप मच गया। अधिकारियों का कहना है कि ये जमीन किसानों को पट्टे के रूप में आवंटित की गई थी। ये पट्टे 2009 में निरस्त हो गए थे। लेकिन न तो राजस्व और सिंचाई विभाग ने जमीन से कब्जे छुड़वाए और न ही चीनी मिलों ने किसानों के गन्ने के सट्टे बंद किए। सिंचाई विभाग धामपुर-अफजलगढ़ क्षेत्र के अधिशासी अभियंता रामबाबू ने रामगंगा कमांड मुरादाबाद के अधिशासी अभियंता डीपी सिंह को स्थिति से अवगत कराया। रामबाबू का कहना है कि उनके खंड की सिंचाई विभाग की जमीन इन गांवों में नहीं है। सिंचाई विभाग के कई खंड हैं। जमीन और खंडों की हो सकती है। राम गंगा कमांड, वन व राजस्व विभाग की इन गांवों में जमीन है।
रामगंगा कमांड के एक्सईएन डीपी सिंह के अनुसार पहले सरकार की नीति थी कि सिंचाई विभाग की जो जमीन विभाग के काम नहीं आ रही है तो उसका सिंचाई विभाग पट्टा कर सकता है। पट्टे की जमीन पर खेती की जा सकती है। यह अतिक्रमण की श्रेणी में नहीं आती है। प्रशासन ने भी खेती की अनुमति दे रखी थी। इससे प्रशासन को राजस्व मिलता था। इसी के अंतर्गत कुछ पट्टे हुए थे। साल 2009 में शासन ने इस नीति को समाप्त कर दिया। नये पट्टे भी बंद कर दिए गए। पहले पट्टे भी प्रभाव हीन हो गए। वे सभी अवैध श्रेणी में आ गए। इन कब्जों को पहले भी हटवाया जा चुका है। कुछ जमीन वन व राजस्व विभाग की है। इन जमीनों से कब्जे हटवाने का काम उन विभागों का है।
जांच के बाद कब्जा हटेंगे
रामगंगा कमांड के अधिशासी अभियंता डीपी सिंह के अनुसार वर्ष 2009 के बाद भी यदि कब्जे हैं तो वे पूरी तरह अवैध हैं। मामले की जांच एसडीओ शेरकोट को दी गई है। वह गन्ना विभाग से सामंजस्य बनाकर जांच करेंगे। जिन गांवों में राम गंगा कमांड की जमीन पर अवैध कब्जा है, उन्हें हटवाया जाएगा।