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किसान आंदोलन से दूर रहे राजनीतिक दल

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बिजनौर। राजनीतिक दलों की किसान के नाम पर राजनीति करने की मंशा अधूरी ही रह गई। प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं को पुलिस ने उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया लेकिन रालोद को छोड़कर अन्य पार्टियों के कार्यकर्ता किसानों के बीच भी नहीं गए। किसानों ने खुद भी भी राजनीतिक दलों से दूरी बनाए रहे।
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कृषि कानूनों के खिलाफ भारत बंद के लिए किसान संगठनों ने आह्वान किया था तो विपक्षी दलों को भी किसानों के बहाने केंद्र व प्रदेश सरकार को घेरने का मौका मिल गया। लेकिन आधी-अधूरी रणनीति और पुलिस की सख्ती ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। सोमवार को सपा कार्यकर्ताओं ने किसान यात्रा निकालने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया था। मंगलवार को भी पार्टी के कई नेताओं को पुलिस ने नजरबंद किया। इसके बावजूद पार्टी के कार्यकर्ता किसानों के बीच नहीं पहुंचे। कांग्रेस के पदाधिकारी तो पार्टी कार्यालय से कलक्ट्रेट तक जरूर पहुंचे लेकिन किसानों के बीच जाना गवारा नहीं किया।
किसानों ने भी इस बात का ध्यान रखा कि कोई नेता चक्का जाम में शामिल होकर राजनीतिक रोटी न सेक सके। किसान समर्थन के लिए व्यापारियों के पास तो गए लेकिन राजनीतिक दलों के पास नहीं। चक्का जाम के दौरान घर में नजरबंद एक सपा नेता ने एक किसान संगठन के पदाधिकारी से फोन पर बात की और चक्का जाम में शामिल होने की इच्छा जताई। नेता के घर पर मौजूद पुलिसकर्मी ने किसान पदाधिकारी से पूछा कि क्या वे नेताजी को चक्का जाम में बुलाना चाहते हैं तो किसान पदाधिकारी ने साफ इंकार कर दिया। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार का कहना है कि किसान संगठन का राजनीति से कोई मतलब नहीं है। किसी को धरने में आने से नहीं रोका गया लेकिन किसी को बुलाया भी नहीं गया।
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प्रशासन की रणनीति रही कारगर
बिजनौर। किसानों के आंदोलन के दौरान प्रशासन की रणनीति कारगर रही। प्रशासन ने कहीं भी किसानों से कोई टकराव नहीं लिया। विपक्षी राजनीतिक दलों पर आंदोलन से दूर रखने में पुलिस प्रशासन कामयाब रहा।
किसानों के चक्का जाम को लेकर प्रशासन ने पहले ही टकराव नहीं करने की रणनीति बना ली थी। विपक्षी राजनीतिक दलों को किसी भी सूरत में आंदोलन में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। खासकर सपा नेताओं को तो दूर रखा जाएगा। ऐसे नेताओं को जो माहौल खराब कर सकते हैं उन पर भी सख्ती बरती जाएगी। किसानों के आंदोलन में रालोद के नेता तो शामिल रहे लेकिन सपा के नेता एक दो जगह को छोड़कर कहीं दिखाई नहीं दिए। कांग्रेस जिलाध्यक्ष शेरबाज पठान व एनएसयूआई जिलाध्यक्ष उदय त्यागी को पुलिस ने उनके आवास पर ही नजरबंद कर दिया। चक्का जाम की मियाद खत्म होते ही पहरा हटा लिया गया। हालांकि रालोद नेताओं पर कोई पाबंदी नहीं थी। हालांकि व्यापारी नेताओं ने भी बंद का समर्थन किया था लेकिन व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद नहीं रखे। व्यापारियों का कहना था कि उनका बंद से क्या लेना देना। पुलिस की इस पर भी नजर रही कि कोई बाजार बंद कराने की कोशिश न करे।
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