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संतान की चाह में दी मासूम बच्ची की बलि

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नहटौर में पकड़ा गया बच्ची की हत्या का आरोपी अर्जुन। - फोटो : BIJNOR
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संतान की चाह में दी मासूम बच्ची की बलि
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बिजनौर। चार साल की मासूम को सिर्फ संतान की चाह में ही मार दिया गया। पत्नी की गोद भर जाए, इसके लिए हत्यारोपी ने पड़ोसी की बेटी की बलि दे दी। जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर अनामिका हत्याकांड का खुलासा कर दिया है।
बृहस्पतिवार को एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह ने प्रेस वार्ता कर मासूम बच्ची की हत्या का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि नहटौर थाना क्षेत्र के गांव अकबरपुर के रहने वाले अंकुर सैनी की चार वर्षीय बेटी अनामिका खेलते हुए स्कूल के पास से 22 मार्च को लापता हो गई थी। जिसका शव 23 मार्च की सुबह नौ बजे गांव के पास ही गन्ने के खेत में गठरी में बंधा मिला। अनामिका की हत्या करने वाले अर्जुन पुत्र चमन सिंह निवासी गांव अकबरपुर देवमल को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि शादी को आठ साल होने के बाद भी उसकी पत्नी को संतान नहीं हुई। जिसे लेकर वह परेशान रहने लगा और अक्सर तांत्रिकों के यहां जाता रहता। हत्यारोपी बच्ची को बहला फुसलाकर अपने खेत में बनी झोपड़ी में ले गया। जहां गला घोंटकर बच्ची को मार डाला। शव को अपनी मां की पुरानी साड़ी में बांधकर गन्ने के खेत में फेंक आया। इस दौरान एएसपी पूर्वी ओमवीर सिंह और सीओ अजय अग्रवाल भी मौजूद रहे। पुलिस ने हत्यारोपी को गिरफ्तार कर चालान कर दिया। आरोपी को पकड़ने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक सतेंद्र सिंह, निरीक्षक अपराध मुकेश चंद, एसआई योगेंद्र सिंह आदि शामिल रहे।
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खुद के जाल में ही फंस गया अर्जुन
खुद के बुने हुए जाल में ही हत्यारोपी फंसता चला गया। दरअसल, हत्या करने के बाद मासूम को रात एक बजे तक तलाश भी कराई। फिर गन्ने के खेत में गठरी पड़े होने की खबर देने से ही शक गहरा गया। पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की तो हत्या की कड़ियां खुल गईं। पुलिस के मुताबिक हत्यारोपी अर्जुन ने बच्ची के परिवार वालों के साथ रहकर दिनभर उसकी तलाश कराई। परिजन रात में एक बजे तक बच्ची को ढूंढते रहे। इस दौरान अर्जुन भी साथ रहा। 23 मार्च की सुबह हत्यारोपी अर्जुन ने बच्ची के ताऊ को फोन किया और कहा कि गन्ने के खेत में गठरी पड़ी है। इस पर परिवार वालों ने मौके पर जाकर देखा तो कपड़े की गठरी में अनामिका का शव बंधा हुआ था। घटनास्थल पर काफी घास और भांग के पेड़ खड़े हुए थे। प्रभारी निरीक्षक के अनुसार रास्ते में चलने वाले किसी व्यक्ति को गठरी दिखाई नहीं दे सकती थी। ऐसे में अर्जुन का सबसे पहले सूचना देना शक के दायरे में ले आया।
मां की पुरानी साड़ी से खुली पोल
पुलिस के अनुसार जिस कपड़े में बच्ची का शव लिपटा हुआ था, वह हत्यारोपी की मां की पुरानी साड़ी थी। अर्जुन ने गांव से बाहर अपने खेत पर झोंपड़ी बना रखी थी, इसी झोंपड़ी में उसकी मां की पुरानी साड़ी पड़ी हुई थी। झोंपड़ी में गला दबाकर हत्या करने के बाद साड़ी में शव की गठरी बनाकर फेंक दिया गया। हत्यारोपी को किसी तांत्रिक ने संतान प्राप्ति के लिए किसी बच्चे की बलि देने का उपाय बताया था। किस तांत्रिक ने यह उपाय बताया, इसकी जानकारी नहीं हो सकी। पुलिस भी हत्यारोपी से इस राज को नहीं उगलवा पाई। पुलिस को सिर्फ इतना ही मालूम पड़ा कि वह तांत्रिकों के पास आता जाता था। अर्जुन 12वीं तक ही पढ़ा हुआ है। जोकि नोएडा में रहकर फास्टफूड का ठेला लगाने का काम करता है। अब होली पर अपने गांव आया था, तब से नोएडा नहीं गया। कुछ समय पहले तक वह बच्ची के ताऊ के साथ रहकर भी काम करता था।
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जिले में पहले भी दी जाती रही हैं बलि
चार की मासूम की बलि देने का मामला पहला नहीं है, बल्कि पहले भी जिले में ऐसे केस सामने आए हैं। साल 2017 में नजीबाबाद के इस्सेपुर गांव में संजय के छह साल के बेटे विनीत की तंत्र क्रिया के चलते ही बलि चढ़ा दी गई थी। बोरे में विनीत का शव मिला था, जिसके कान कटे हुए थे। साल 2019 के सितंबर माह में शेरकोट के गांव खड़कसेन में पांच साल की बच्ची चांदनी की हत्या कर दी गई थी। जिसके शव पर जगह जगह दागने के निशान बने हुए थे। इस मामले में भी तांत्रिक किया का होना पाया गया था।
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