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Bijnor News: बजट में महंगाई ने सेंध मारी, किराये पर लेनी पड़ रही शेरवानी

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बिजनौर में शादी के लिए एक दुकान पर शेरबानी पहनकर देखता युवक। संवाद
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- जिले में काफी दुकानों पर मिल रही हैं किराए पर शेरवानी
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- शादी के बाद किराया देकर लोग लौटा देते हैं शेरवानी

संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। शादी का दौर चल रहा है। कपड़ों की दुकानों पर खरीदारों की काफी भीड़ नजर आ रही है। लोग पहले दूल्हे के लिए शेरवानी और दुल्हन का लहंगा खरीदते थे। मगर, अब बढ़ती महंगाई ने बजट में भी कटौती कर दी है। ऐसे में अब किराये पर शेरवानी और लहंगा लेने का चलन बढ़ गया है। करीब 75 प्रतिशत लोग किराए पर भी शेरवानी और लहंगा खरीद रहे हैं।

महंगी शेरवानी खरीदने के बाद लोग आमतौर पर शेरवानी शादी समारोह में ही पहनते हैं। रोजाना पेंट शर्ट, टीशर्ट, कुर्ता पजामा जैसे साधारण कपड़ों का प्रयोग करते हैं। इसी वजह से लोगों ने शेरवानी खरीदने के खर्चे को कम लिया है।
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जी हां, अब कम लोग ही शेरवानी, लहंगा-चुनरी की खरीदारी कर रहे हैं। ज्यादातर लोग किराए पर ही शेरवानी ले रहे हैं। एक रात के लिए शेरवानी एक हजार रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक किराया लिया जा रहा है। अच्छी शेरवानी की कीमत तीन हजार से अधिक होती है।
व्यापारियों ने अलग-अलग शेरवानी किराए पर देने के लिए रख रखी हैं। लोगों ने अपनी दुकानों के बाहर लिखवा दिया है कि हमारे यहां शादी के लिए किराए पर शेरवानी मिलती है।

व्यापारी शिव कुमार गुप्ता ने बताया कि वह किराए पर शेरवानी देते हैं। हर सहालग में उनकी दुकान से 100 शेरवानी किराए पर जाती हैं। एक रात के लिए 1500 रुपये तक किराया है। पिछले आठ सालों से किराए पर शेरवानी का चलन बढ़ा है।

व्यापारी नमन गंभीर का कहना है कि किराए पर शेरवानी का चलन बढ़ने से खरीदारी पर असर पड़ा है। कम लोग ही शेरवानी खरीद रहे हैं। क्योंकि अच्छी शेरवानी चार हजार से अधिक कीमत में आती है।
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व्यापारी सचिन अग्रवाल ने कहा कि ज्यादातर लोग शादी में शेरवानी और लहंगा-चुनरी किराए पर ले रहे हैं। मगर जिन्हें अपनी शेरवानी खरीदनी है, वह अब भी खरीदारी कर रहा है। अभी भी लोग इनकी खूब खरीदारी कर रहे हैं।
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