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कोरोना के झटके के बाद फिर रफ्तार पकड़ने लगे उद्योग

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कोरोना के झटके के बाद फिर रफ्तार पकड़ने लगे उद्योग
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बिजनौर। कोरोना काल में लड़खड़ाने वाला उद्योग एक बार फिर से अपने पैरों पर खड़ा होने को तैयार है। वोकल फोर लोकल के नारे से उद्यमियों को फायदा हुआ है। किसानों से जुड़े कोल्हुओं ने भी इस बार बड़ी संख्या में पैर पसारे हैं। उद्योगों को सरकार ने प्रोत्साहन दिया तो नए उद्योगों के लिए भी उद्यमी आवेदन करने लगे हैं।
जिले में छोटे बड़े करीब चार हजार उद्योग चलते हैं। नगीना के विख्यात काष्ठकला उद्योग को एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया है। काष्ठकला उद्योग का सालाना करीब 400 करोड़ का टर्नओवर होता है। योजना में कोरोना काल से पहले जिले के उद्योगों को काफी फायदा हो रहा था। काष्ठकला के नए उद्योग लगाने के लिए उद्यमी आगे आ रहे थे। लेकिन कोरोना काल काष्ठकला उद्यमियों के लिए नुकसानदायक साबित हुआ। जिस समय लॉकडाउन लगा उस समय नगीना के काष्ठकला उद्यमियों के पास करीब 200 करोड़ रुपये के ऑर्डर थे। कोरोना की वजह से ये ऑर्डर पेंडिंग में डाल दिए गए। बाद में कुछ ऑर्डर फिर से बहाल हो गए। निर्यात कम होने के बाद सरकार ने वोकल फोर लोकल का नारा दिया। जनता से देशी सामान खरीदने का आह्वान किया। इसका फायदा काष्ठकला उद्यमियों को हुआ। दीपावली पर पहली बार छोटे मोटे आइटम बाजार में आए। लोगों ने इन्हें पसंद भी किया।
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सैनिटाइजर बना नया उद्योग
कोरोना काल में चीनी उद्योग प्रभावित हुआ। उठान कम हुआ तो चीनी के दाम गिरे लेकिन चीनी मिलों में पहली बार सैनिटाइजर बनना शुरू हुआ। जिले की चीनी मिलों में बना सैनिटाइजर पूरे देश में बेचा गया। इससे चीनी मिलों को थोड़ी राहत मिली। सरकार ने उद्योगों को राहत देने के लिए काफी छूट दी। सरकार ने खांडसारी उद्योगों के लाइसेंस फ्री किए तो जिले में खांडसारी की बड़ी तादाद में इकाइयां लगीं। कोल्हू भी इस बार बड़ी तादाद में लगे हैं। पहली बार कोल्हू लगाने पर उद्योग विभाग की ओर से ऋण भी दिया गया है।
स्वयं सहायता समूह ने कराई आमदनी
जिले में स्वयं सहायता समूहों को भी बड़ी तादाद में प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सैकड़ों स्वयं सहायता समूह जिले में काम कर रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों व राशन की दुकानों पर राशन बांटने का काम भी स्वयंसहायता समूहों की महिलाओं को दिया गया है। जिले में इस साल करीब 150 करोड़ का ऋण उद्योगों के विकास के लिए बांटा गया है। करीब 15 हजार उद्यमियों को अलग-अलग वर्ग में यह ऋण बांटा गया है। उद्योगों को बढ़ाने के प्रयास तो हुए लेकिन उनकी मूलभूत सुविधाओं को पूरा नहीं किया गया। घोषणा के बाद भी लैंड बैंक नहीं बनाए गए। बंद पड़ी कताई मिल के दिन भी नहीं बहुरे। यहां उद्यमियों को प्लाट आवंटित किए जा सकते हैं।
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उद्योग एक नजर में
उद्योग इकाई रोजगार टर्नओवर (करोड़)
सूक्ष्म 3558 16878 500
लघु 280 5297 130
मध्यम 13 620 70
बड़े उद्योग 20 22000 4000
जीएसटी संकलन
महीना 2019 2020
अप्रैल 15.03 1.07
मई 18.02 5.58
जून 15.09 16.63
जुलाई 19.50 20.07
अगस्त 15.79 25.91
सितंबर 11.52 16.89
अक्तूबर 10.66 14.54
नवंबर 16.21 17.34
नोट : राशि करोड़ रुपये में है।
पटरी पर लौट रहे उद्योग
उद्यमी मनी खन्ना का कहना है कि कोरोना की वजह से कोई भी उद्योग बंद नहीं हुआ है। जो उद्योग प्रभावित हुए थे वे धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहे हैं। सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं का भी उद्यमियों को लाभ मिला है।
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