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अपनी काव्य संरचनाओं से देश में बढ़ा रहे हिंदी का गौरव

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डॉ.सुशील कुमार त्यागी। - फोटो : BIJNOR
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अपनी काव्य संरचनाओं से देश में बढ़ा रहे हिंदी का गौरव
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बिजनौर। गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर में प्रवक्ता तथा उपाचार्य डॉ. सुशील कुमार त्यागी पूरे देश में हिंदी का गौरव बढ़ा रहे हैं। मात्र 14 वर्ष की आयु में कविता लिखना शुरू करने वाले सुशील त्यागी का गीत, गजल, मुक्तक, कविताएं और शोध प्रबंध भी प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें दर्जनभर से अधिक सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं।
जनपद बिजनौर के ग्राम सिसौना में जन्मे डॉ. सुशील त्यागी वर्तमान में ज्वालापुर स्थित गुरुकुल महाविद्यालय में प्रवक्ता हैं। उन्होंने बिहारी सतसई के पद्म सिंह शर्मा कृत संजीवन भाष्य का अनुशीलन शोध प्रबंध लिखा। वे अमित के उपनाम से लेखन कार्य करते हैं। उन्होंने सन 1994 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर आधारित ओजस्वी काव्य सुभाष शतक लिखा था। सुभाष शतक घनाक्षरी छंद में लिखा गया काव्य है। सुभाष शतक में उन्होंने सुभाष चंद्र बोस के पूरे जीवन काल को समाहित किया है।
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डॉ सुशील त्यागी कहते हैं कि हिंदी से जोड़ने के लिए कहानी और कविताएं सबसे सरल माध्यम है। उन्होंने 280 स्फुट काव्य रचनाएं की हैं जिनमें गीत, गजल, मुक्तक और कविताएं सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने लघु कथाएं और कहानियां भी लिखी हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति के पुरोधा आचार्य पंडित हरि त्यागी स्मृति ग्रंथ का संपादन किया। कविता पुष्प काव्य संकलन भी उन्होंने लिखा है। उनके द्वारा लिखे गए कई शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध गोष्ठियों में पढ़े जा चुके हैं।
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पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में उन्होंने काव्य पाठ किया है। उनकी कई रचनाएं आकाशवाणी से प्रकाशित हुई हैं। वह बताते हैं कि विश्व विख्यात साहित्यकार कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर तथा विष्णु प्रभाकर, पद्मश्री क्षेमचंद सुमन जैसे महान साहित्यकारों ने उनकी रचनाओं को सराहा है। हिंदी में पीएचडी, साहित्याचार्य, भाषा विज्ञानाचार्य की उपाधि से विभूषित डॉ. सुशील त्यागी को दीपशिखा सम्मान, हिंदी पुष्प सम्मान, विद्यावाचस्पति, बाल साहित्य गौरव सम्मान सहित दर्जन भर से अधिक राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। डॉ सुशील त्यागी बताते हैं कि वह निरंतर छात्र-छात्राओं से हिंदी के बारे में बात करते हैं तथा उन्हें हिंदी कविताओं और कहानियों से जोड़ने का प्रयास करते हैं। अपने प्रयास से वह हिंदी को समृद्ध कर रहे हैं।
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