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सुरक्षा की खानापूरी से हुई घटना

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सुरक्षा के प्रति लापरवाही में हुई वारदात
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। घटनाएं होती है, शोर मचता है। जांच बैठती है और फिर बाद सब शांत हो जाता है। व्यवस्था फिर पुराने ढर्रे पर आ जाती है। ऐसा ही बिजनौर जजी की सुरक्षा को लेकर हुआ। सुरक्षा के नाम पर जजी में केवल औपचारिकताएं की जा रही हैं। इसको लेकर अधिवक्ताओं का कहना है कि सुरक्षा इंतजाम के प्रति लापरवाही में यह वारदात हुई है। कई साल पहले न्यायालयों के बढ़ते हादसों और घटनाओं को देख जिला न्यायालय में सुरक्षा बढ़ाई गई थी। जजी के मुख्यद्वार पर मेटल डिटेक्टर लगाया गया था। अन्य मार्ग का आवागमन बंद कर दिया गया था। जजी के नए भवन के प्रमुख द्वार पर भी मेटल डिटेक्टर लगाया गया था। उस समय बड़ी सुरक्षा थी। धीरे धीरे सुरक्षा पुराने ढर्रे पर आ गई। मुख्य द्वार के मेटल डिटेक्टर पर मात्र खानापूर्ति ही हो रही है।
- हाईकोर्ट की तर्ज पर हो सुरक्षा व्यवस्था
जिला बार अध्यक्ष एसके बबली का कहना है कि जजी में सुरक्षा का इंतजाम पुख्ता नहीं है। कोर्ट परिसर में लगे मेटल डिटेक्टर शोपीस बने हैं। सुरक्षा के नाम पर पीएसी के छह जवान बैठे रहते हैं। हाईकोर्ट की तर्ज पर जजी में सुरक्षा के सख्त इंतजाम होने चाहिए। लोगों को गहन तलाशी के बाद ही अंदर आने दिया जाए।
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रामभरोसे है सुरक्षा
जिला बार के महासचिव नवदीप सिंह का कहना है कि कोर्ट में सुरक्षा राम भरोसे है। कोई भी कुछ भी लेकर आ जाता है। इतनी बड़ी जजी और हजारों लोगों की सुरक्षा के लिए गिनती के पुलिसकर्मी तैनात हैं। जजी में कड़ी सुरक्षा होनी चाहिए कि ताकि कोई अपराधी किसी घटना को अंजाम देने की न सोच पाए।
सुरक्षा के इंतजाम नहीं
अधिवक्ता नृपेंद्र देशवाल का कहना है कि जजी में सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। वादकारी भी वकीलों के साथ आसानी से कोर्ट के अंदर चले जाते हैं। कोई भी देखने नहीं आता है। साल में एक या दो बार ही पुलिस अफसर जांच करने के लिए आते हैं, लेकिन होता कुछ नहीं है।
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मशीनें बनीं डमी
अधिवक्ता विवेक चौधरी का कहना है कि जजी में लगी चेकिंग मशीन डमी बनी हैं। कोई चेकिंग नहीं कोई सुरक्षा नहीं। वकील भी सुरक्षित नहीं हैं। पहले भी जजी में ऐसी वारदात होती रही हैं। बड़े व कुख्यात बदमाशों की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग से होनी चाहिए।
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